एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

नई दिल्ली। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना की आंखों के इलाज में माहिर एक टीम ने रांची के नामकुम स्थित मिलिट्री हॉस्पिटल में ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के तहत 9वां मेगा सर्जिकल एडवांस्ड आई कैंप सफलतापूर्वक आयोजित किया। इस कैंप में 2,500 से ज़्यादा मरीज़ों की जांच की गई और आंखों की रोशनी वापस लाने वाली 300 से ज़्यादा प्रक्रियाएं की गईं। इनमें 260 से ज़्यादा मोतियाबिंद की सर्जरी शामिल थीं, जिनमें से 100 से ज़्यादा का फ़ायदा ज़रूरतमंद आदिवासी मरीज़ों को मिला। कैंप में एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी, डायबिटिक रेटिनोपैथी का सर्जिकल इलाज और आंखों की रोशनी बचाने वाले एंटी-VEGF इंजेक्शन जैसी सुविधाएं भी दी गईं। समापन समारोह की अध्यक्षता करने वाले रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ‘ऑपरेशन दृष्टि’ टीम के समर्पण और पेशेवर रवैये की तारीफ़ की। इस पहल को “सेवा परमो धर्मः” (सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है) के हमारे संकल्प का जीता-जागता उदाहरण बताते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को दर्शाता है, बल्कि आर्मी मेडिकल कोर के असाधारण कौशल, प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता का भी प्रदर्शन है। मिशन ‘दृष्टि’ की शुरुआत से अब तक के कुल असर पर प्रकाश डालते हुए, रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि देशभर में 75,000 से ज़्यादा मरीज़ों की जांच की गई है और आंखों की रोशनी वापस लाने वाली 3,000 से ज़्यादा सर्जरी की गई हैं। बिहार रेजिमेंट के स्वर्गीय पूर्व हवलदार जॉन ऑगस्टस एक्का की 68 वर्षीय पत्नी श्रीमती एक्का मोतियाबिंद की समस्या के साथ कैंप में पहुंची थीं, जिससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफ़ी कम हो गई थी। फ़ैकोइमल्सीफिकेशन और इंट्राओकुलर लेंस इम्प्लांटेशन की सफल प्रक्रिया के ज़रिए उनकी आंखों की रोशनी वापस आ गई, जिससे पूर्व सैनिकों के परिवारों के कल्याण के प्रति सेना की अटूट प्रतिबद्धता फिर से साबित हुई। एक और लाभार्थी, रांची की रहने वाली 63 वर्षीय आदिवासी महिला एलिज़ा बेथ, जिनका सेना से कोई संबंध नहीं था, का भी फ़ैकोइमल्सीफिकेशन की सफल प्रक्रिया के ज़रिए दाहिनी आंख के मोतियाबिंद का इलाज किया गया। समाज के सभी वर्गों की सेवा करने के ‘ऑपरेशन दृष्टि’ के संकल्प की वजह से उनके लिए आंखों की एडवांस्ड देखभाल पाना संभव हो सका। इसी तरह, झारखंड के रहने वाले 50 वर्षीय आदिवासी अशोक देशमुख की भी इस कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद की सफल सर्जरी हुई। सेना से जुड़े न होने के बावजूद, उन्हें वही बेहतरीन मेडिकल सुविधाएँ मिलीं जो सेना के मौजूदा जवानों और पूर्व सैनिकों को मिलती हैं; यह इस पहल की सबको साथ लेकर चलने की भावना को दिखाता है। इस कैंप का उद्घाटन 15 जून, 2026 को आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज़ की डायरेक्टर जनरल वाइस एडमिरल आरती सरीन ने किया। ‘ऑपरेशन दृष्टि’ की देशव्यापी पहुँच बढ़ाने में उनकी सोच बहुत अहम रही है। समापन समारोह में GOC 17 कोर के लेफ्टिनेंट जनरल यश सिंह अहलावत, MG Med (HQ ईस्टर्न कमांड) के मेजर जनरल ज्योतिंदु देबनाथ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सर्जरी का काम आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल), दिल्ली कैंट में नेत्र रोग विभाग के प्रमुख ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा की देखरेख में किया गया। दिसंबर 2024 में देहरादून में शुरू हुए पहले कैंप के बाद से, ‘ऑपरेशन दृष्टि’ का दायरा जयपुर, बागडोगरा, उधमपुर, लक्षद्वीप, भुज, गोरखपुर और लेह-लद्दाख में कैंप लगाकर पूरे देश में बढ़ाया गया है। रांची के नौवीं जगह बनने के साथ ही, यह पहल भारत में सेना के सबसे बड़े और लगातार चलने वाले मेडिकल आउटरीच कार्यक्रमों में से एक बन गई है।

 

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