माकपा ने की सीईओ से मांग : मतदान सूची से बाहर न हो कोई भी जैनुन नागरिक
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। कम्युनिस्ट पार्टी आफ इण्डिया मार्कि्स्ट (माकपा) ने उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम से अनुरोध किया है विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनायी जाय ताकि कोई भी कोई भी जैनुन नागरिक मतदाता सूची में जुडने से बंचित न हो। हांलाकि पार्टी ने इस सन्दर्भ में समय समय पर आयोजित निर्वाचन बैठकों में राज्य निर्वाचन तथा जिला निर्वाचन बैठकों में महत्तपूर्ण सुझाव दिये हैं,जिन्हें बैठक ने गम्भीरता से लिया है! पार्टी ने यह अनुरोध किया है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने से वंचित नहीं रहना चाहिए और नोटिस पाने वाले मतदाताओं को सुनवाई के दौरान किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े इस बात का विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है, पार्टी ने कहा है कि नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुऐ चुनाव से जुडे अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रति सहयोगात्मक रूख रखना चाहिए। पार्टी की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब राज्य में एसआईआर अभियान अपने दूसरे चरण में है और करीब 19 लाख मतदाताओं को उनके रिकॉर्ड में विसंगतियों को लेकर नोटिस जारी किए गए हैं । गौरतलब है कि इस प्रक्रिया के तहत 12 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम पहले ही सूची से हटा दिए गए हैं, मुख्य रूप से मृत्यु, स्थानांतरण और डुप्लीकेट प्रविष्टियों के कारण। माकपा ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि एसआईआर प्रक्रिया को इस प्रकार संचालित किया जाए कि मतदाताओं को नोटिस का जवाब देने और अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर मिले। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि कहीं ऐसा न हो कि तकनीकी कारणों से या सुनवाई की उचित व्यवस्था न होने के कारण किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से निकल जाए इसलिये समय व दिन भी बढाने पडे तो निर्वाचन मशीनरी को समय बढाने का निर्णय भी लेना होगा “. पार्टी ने कहा संज्ञान में है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. पुरुषोत्तम ने पहले ही सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं को उनकी सुनवाई के लिए पर्याप्त समय दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि नोटिस समय पर उन तक पहुंचें। सीईओ ने जिलाधिकारियों को एसआईआर प्रक्रिया की नियमित समीक्षा करने और दस्तावेज़ सत्यापन में सहायता के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए हैं। पार्टी ने कहा एसआईआर प्रक्रिया के तहत 14 जुलाई से 13 अगस्त 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं, जबकि नोटिस की सुनवाई और निपटान की प्रक्रिया 11 सितंबर 2026 तक पूरी होगी । अंतिम मतदाता सूची 15 सितंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। माकपा की यह मांग सुनिश्चित करना चाहती है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आम नागरिकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया सरल एवं सुलभ बनी रहे।
