डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर में उझ बहुउद्देशीय परियोजना की स्थिति की समीक्षा की
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग तथा कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ जिले में उझ बहुउद्देशीय परियोजना (एमपीपी) की स्थिति और इसके चरणबद्ध कार्यान्वयन से संबंधित रोडमैप की समीक्षा की।
केन्द्रीय मंत्री ने वैपकॉस लिमिटेड के अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक की। वैपकॉस लिमिटेड जलशक्ति मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक उपक्रम है, जिसे इस परियोजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस परियोजना को तेजी से लागू करने पर जोर दिया ताकि इसके लाभ जल्द से जल्द लोगों तक पहुंच सकें। उन्होंने वैपकॉस को सलाह दी कि वे गुणवत्ता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखते हुए नए समाधानों तथा इसके कार्यान्वयन की बेहतर रणनीतियां ढूढ़ें।
केन्द्रीय मंत्री को बताया गया कि यह परियोजना विभिन्न चरणों में पूरी की जाएगी। भूमि के अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया के संपन्न होने की प्रतीक्षा किए बिना ही काम शुरू कर दिया जाएगा, जबकि बाकी भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी साथ-साथ चलती रहेगी। कार्यान्वयन करने वाली एजेंसी परियोजना स्थल और उससे संबंधित जरूरतों पर भी काम कर रही है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, लंबे समय से अटकी हुई विभिन्न राष्ट्रीय परियोजनाओं को नई तेजी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग एक सदी पहले परिकल्पित की गई उझ बहुउद्देशीय परियोजना पर दशकों तक कोई काम नहीं हुआ, जबकि शाहपुरकंडी परियोजना भी करीब चार दशकों से अटकी हुई थी। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में हुई देरी के कारण रावी और उसकी सहायक नदियों का पानी बहकर पाकिस्तान में जाता रहा।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि जब सिंधु जल संधि लागू थी, तब भी संधि के तहत रावी, सतलज और ब्यास भारत की तीन नदियां थीं, जिनमें रावी मुख्य नदी थी। उन्होंने बताया कि यह संधि अभी स्थगित है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2019 में शाहपुरकंडी परियोजना को फिर से शुरू करना (जो अब लगभग पूरा हो चुका है) और 2026 में उझ बहुउद्देशीय परियोजना को फिर से शुरू करना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के उस संकल्प को दर्शाता है जिसके तहत लंबे समय से अटकी परियोजनाओं को पूरा करना, भारत के जल संसाधनों का बेहतर सदुपयोग करना और लोगों को ठोस लाभ पहुंचाना है।
रावी नदी की मुख्य सहायक नदी, उझ नदी पर बनने वाली उझ बहुउद्देशीय परियोजना को लगभग 186 मेगावाट से 212 मेगावाट बिजली पैदा करने हेतु डिजाइन किया गया है। इससे जम्मू एवं कश्मीर के कठुआ एवं सांबा जिलों तथा पंजाब के पठानकोट एवं गुरदासपुर जिलों में लगभग 90,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होने की उम्मीद है। यह परियोजना कठुआ जिले को पेयजल और उद्योगों के लिए पानी भी उपलब्ध कराएगी।
इस परियोजना से खेती की उत्पादकता बढ़ने, जल सुरक्षा बेहतर होने, आर्थिक विकास के नए अवसर सृजित होने और इस केन्द्र-शासित प्रदेश की कुल सामाजिक-आर्थिक प्रगति में योगदान मिलने की उम्मीद है। सुरक्षा और सीमा-प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी इसका एक अहम पहलू है। गृह मंत्रालय इस परियोजना का इसलिए समर्थन कर रहा है ताकि पानी के अनियंत्रित बहाव को रोका जा सके और नदी से होकर सीमा पार से घुसपैठ के संवेदनशील रास्तों को बंद किया जा सके। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न उपलब्धियों की विस्तार से समीक्षा की और सभी हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल और समय पर काम पूरा करने हेतु प्रभावी निगरानी की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने इस अहम परियोजना को सफलतापूर्वक कार्यान्वित और समय पर पूरा करने हेतु वैपकॉस को सरकार की ओर से पूरा समर्थन एवं सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
