जब कैरोसीन ऑयल के लिए भी एडवर्टाइज़िंग सॉन्ग गाया गया
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। 1940-50 के दशक में मोहम्मद रफ़ी ने बर्मा शेल कंपनी के केरोसिन (मिट्टी के तेल) के प्रचार के लिए एक मशहूर विज्ञापन गीत (जिंक) “घर-घर में मुस्काए रोशनी और अंधेरा हाथ मले, गांव-गांव और नगर-नगर में बर्मा शेल का तेल जले हो…” गाया था। उस दौर में यह सिर्फ रेडियो पर चलाया जाता था क्योंकि विज्ञापन का वही मुख्य साधन था। उस समय लकड़ी सस्ती होने के कारण लोग केरोसिन कम खरीदते थे, इसलिए यह गाना रेडियो पर प्रसारित किया गया ताकि गांवों और शहरों में बिक्री बढ़ सके। बर्मा शेल एक प्रमुख ब्रिटिश स्वामित्व वाली तेल कंपनी थी, जिसकी स्थापना 1928 में बर्मा ऑयल कंपनी और रॉयल डच शेलकी साझेदारी से हुई थी। इसने 1928 में मुंबई में देश का पहला ड्राइव-थ्रू पेट्रोल पंप स्थापित करके, दूरदराज के गांवों में केरोसिन की आपूर्ति करके और 1950 के दशक में खाना पकाने की गैस (एलपीजी) की शुरुआत करके भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 24 जनवरी, 1976 को भारत सरकार द्वारा पूर्णतः अधिग्रहण कर लिया गया। पहले इसका नाम बदलकर भारत रिफाइनरीज लिमिटेड रखा गया, और बाद में यह आज की सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल)के रूप में विकसित हुई।
मोहम्मद रफ़ी और गीता रॉय ने कैरोसीन ऑयल के लिए भी एडवर्टाइज़िंग सॉन्ग गाया था। जी हां, उस ज़माने में कैरोसीन की सेल के लिए भी विज्ञापन बनते थे। हर इंसान तब कैरोसीन नहीं खरीदता था। क्योंकि लकड़ियां और गोबर के उपले कैरोसीन के मुकाबले सस्ते होते थे। गोबर के उपले तो लोग मुफ़्त में ही जमा कर लेते थे। ऐसे में ऑयल कंपनीज़ विज्ञापनों के ज़रिए लोगों को कैरोसीन खरीदने के लिए प्रेरित करती थी। उस ज़माने की एक बड़ी ऑयल कंपनी बर्मा शेल ने मोहम्मद रफ़ी और गीता रॉय को अपने कैरोसीन ऑयल के प्रमोशन के लिए हायर किया था। चूंकि उस वक्त तक गीता जी की शादी गुरूदत्त साहब से नहीं हुई थी, तो वो गीता दत्त नहीं, गीता रॉय के नाम से ही फ़िल्म इंडस्ट्री में मशहूर थी। बर्मा शेल ने इन दोनों गायकों से एक-एक गाना रिकॉर्ड कराया था। अगर आप यूट्यूब पर तलाशेंगे तो दोनों गीत आपको सुनने के लिए मिल जाएंगे। रफ़ी साहब ने बर्मा शेल के लिए जो गाना गाया था उसके बोल हैं “घर घर में मुस्काए रोशनी और अंधेरा हाथ मले। गांव-गांव और नगर-नगर में बर्मा शेल का तेल जले।” कोई एस. अथैया थे जिन्होंने ये गाना लिखा था। और कंपोज़ किया था इस गाने को संगीतकार मुकुल रॉय ने। बात अगर गीता जी की करें तो उन्होंने बर्मा शेल के लिए जो गाना गाया था उसके बोल हैं “चाचा मेरे सोना ना। जो कुछ मैं पूछूं बतलाना। देखो गुस्सा होना ना चाचा। हो चाचा।” ये गाना भी एस. अथैया ने ही लिखा था। लेकिन इसके कम्पोज़र अलग थे। इस गाने को कम्पोज़ किया था संगीतकार शंकर दासगुप्ता ने। तो किसी दिन फुर्सत निकालिए। और यूट्यूब पर ये दोनों गाने सुनिए। दोनों गाने आपको पसंद आएंगे। आखिर में ये भी जान लीजिए कि बर्मा शेल ने इन दोनों गानों को रेडियो पर भी खूब चलवाया था। और बाद में इन दोनों गीतों के रिकॉर्ड्स भी रिलीज़ किए गए थे।
