केंद्र व राज्य मिलकर किसानों के उत्पादों को नई पहचान देंगे : शिवराज सिंह
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज पटना में “कृषि जन कल्याण संवाद” में कहा कि किसान देश की आधारशिला हैं और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार उनकी आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आईसीएआर के प्रदर्शन मॉडल और बिहार के सफल किसानों का उदाहरण देते हुए छोटे-खेतों में आय बढ़ाने के व्यावहारिक तरीकों पर जोर दिया। कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा, ग्रामीण विकास मंत्री श्री श्रवण कुमार और राजस्व मंत्री श्री दिलीप जायसवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान और ग्रामीण प्रतिनिधि उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने पटना में आयोजित “कृषि जन कल्याण संवाद” में किसानों से मिलकर उनकी समस्याएँ सुनी और सुझाव जानें। वहीं, केंद्र की नीतियों व सफल कृषि मॉडलों का परिचय भी दिया। उन्होंने कहा कि धरती पर अगर कोई भगवान है तो वह किसान है और किसान की सेवा उनकी प्राथमिकता है। श्री चौहान ने खास तौर पर छोटे-किसानों की बेहतरी के लिए बताया कि कम जमीन पर भी इंटीग्रेटेड फार्मिंग से स्थिर आय संभव है। कृषि मंत्री श्री चौहान ने आईसीएआर के पूर्वी परिसर में लागू इंटीग्रेटेड फार्मिंग का विवरण साझा किया। उदाहरण के रूप में 2-3 बीघे के मॉडल में धान के बाद खेतों को चार हिस्सों में बाँटकर गेहूँ, चना, सरसों और मक्का लगाया जा रहा है। साथ ही भू-तालाब में मछली पालन, पोल्ट्री यूनिट, बतख पालन, बेल वाली सब्जियाँ, फलदार पेड़ और चारा खेत की व्यवस्था से परिवार की आय महीने-दर-महीने बढ़ती रहती है। ऐसे समेकित मॉडल में विभिन्न आय स्रोतों के कारण सालभर आमदनी स्थिर रहती है और कई परिवारों की वार्षिक आमदनी लगभग 2 लाख रुपये तक पहुँच रही है।श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती के फायदे भी रेखांकित किए और किसानों से आग्रह किया कि बड़े खेतों पर पूरी तरह लागू करने से पहले अपने एक हिस्से पर प्राकृतिक व उन्नत खेती आजमाकर देखें। उन्होंने बताया कि केमिकल-खादों के अधिक प्रयोग से जमीन की सेहत खराब हो रही है, इसलिए जैविक और संतुलित खेती पर जोर देना जरूरी है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य मिलकर किसानों के जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर काम करेंगे ताकि किसानों को बेहतर दाम व पहचान मिले।कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रगतिशील किसानों- श्री रामजीत शर्मा, श्री रामकुमार विनय, सुशीला देवी जी व श्री सुधांशु के अनुभवों की सराहना की और उनसे कहा कि उनके सुझावों को सरकार गंभीरता से लेगी। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने खेतों में ही रुककर किसानों के बीच समय बिताना पसंद किया, न कि होटलों में; ऐसा करके वे जमीन की वास्तविक स्थिति और किसानों की जीवनशैली को बेहतर समझ पाते हैं। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह संवाद केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों से मिलने और उनकी समस्याओं का जीवंत परिचय लेने का माध्यम था। उन्होंने वादा किया कि बिहार की मिट्टी और किसानों से जुड़ी पहलें आगे भी देखने आएँगे और केंद्र-राज्य सहयोग से किसानों की आमदनी व जीवनस्तर सुधारने के ठोस कदम उठाए जाएंगे।
