August 21, 2026

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली। आज पुणे में आयोजित 12वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचे। इस दौरान डिजिटल ब्रिक्स फोरम और एक्स्पो का आयोजन आज पुणे में किया गया, जिसमें ब्रिक्स के सदस्य देशों की सरकार, उद्योग जगत, शिक्षाविद, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधि एक साथ शामिल हुए। 2021 में भारत द्वारा आयोजित 7वीं ब्रिक्स संचार मंत्रियों की बैठक में स्थापित यह मंच ब्रिक्स आईसीटी ट्रैक का बहु-हितधारक मंच है। भारत आने वाले प्रतिनिधिमंडलों के लिए एक सांस्कृतिक कार्यक्रम और रात्रिभोज का आयोजन किया गया। प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करते हुए केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि संस्कृति और आपसी मेल-जोल की इस खास शाम में आपका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। भारत सरकार और भारत के लोगों की ओर से मैं अपने सभी सम्मानित अतिथियों का हार्दिक स्वागत और अभिनंदन करता हूं। पिछले कुछ दिनों में पुणे न केवल सरकारों के बल्कि विचारों, नवाचार और साझा आकांक्षाओं का मिलन स्थल बन गया है। ब्रिक्स आईसीटी कार्य समूह, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर फोकस ग्रुप, इंस्टीट्यूट ऑफ फ्यूचर नेटवर्क्स, डिजिटल ब्रिक्स टास्क फोर्स और डिजिटल ब्रिक्स फोरम के माध्यम से हमारे विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने ऐसे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के तरीकों पर काम किया है जो समावेशी, सुरक्षित और मजबूत हों। दिन भर में दो खास विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा साइबर सुरक्षा और भरोसेमंद आईसीटी (जिसमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी शामिल है) पर थी। इसमें डिजिटल बदलाव से जुड़ी सुरक्षा और भरोसे के पहलुओं पर बात की गई। ब्रिक्स मंत्रियों ने हमेशा इस बात पर बल दिया कि इसके लिए एक संतुलित और समग्र दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, जो निजता, जनहित और संवेदनशील यूजर्स की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए डिजिटल विकास को आगे बढ़ाए। दूसरा सत्र स्थायी और मजबूत डिजिटल और आईसीटी पारिस्थितिकी तंत्र पर था। इसमें सभी के लिए सार्थक और सस्ती कनेक्टिविटी, ऊर्जा-कुशल और जलवायु-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और सैटेलाइट व नॉन-टेरेस्ट्रियल सिस्टम (गैर-स्थलीय प्रणाल ) जैसे नए तरीकों की भूमिका पर चर्चा की गई। विषयगत पैनल के दौरान स्थायी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय संचार राज्य मंत्री ने कहा कि दशकों तक इंफ्रास्ट्रक्चर की कहानी सड़कों, बंदरगाहों और पावर ग्रिड के जरिए बताई जाती रही है। आज भारत दुनिया के सामने एक अलग कहानी पेश करता है। यह कहानी है डिजिटल पहचान, बैंकिंग, भुगतान, दस्तावेज, सहमति-आधारित डेटा और बड़े पैमाने पर सेक्टर-स्पेसिफिक नेटवर्क की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मॉडल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम बनाने वाली बात यह है कि वास्तविक नवाचार किसी एक ऐप में नहीं है। यह वास्तुकला दर्शन है जो खुला, अंतर-संचालित और बड़े पैमाने पर काम कर सकती है। हर कंज्यूमर एप्लीकेशन बनाने की कोशिश करने के बजाय सरकार और उसके सार्वजनिक संस्थान एक मूलभूत अवसंरचना तैयार करते हैं। साइबर सुरक्षा और विश्वसनीय आईसीटी (जिसमें बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भी शामिल है) पर आयोजित पैनल चर्चा में दूरसंचार विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल सक्षमता और सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और भरोसे के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा को भी सिस्टम के डिजाइन में ही शामिल किया जाना चाहिए न कि बाद में किसी अतिरिक्त उपाय के तौर पर उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। डिजिटल परिदृश्य को सुरक्षित करने के लिए सचिव श्री अमित अग्रवाल ने तीन प्रमुख स्तंभों को रेखांकित किया। सबसे पहले, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण जो डिजाइन द्वारा सुरक्षित हो। दूसरा, डिजिटल कंटेंट देने या डिजिटल पर्सनल डेटा इकट्ठा करने वालों के लिए कानूनी तौर पर यह जरूरी बनाना कि वे ऐसा सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से करें। तीसरा, कानून और डिजिटल माध्यमों से लोगों को सशक्त बनाना, ताकि वे अपने अधिकारों की रक्षा कर सकें और अपनी शिकायतों का असरदार ढंग से समाधान पा सकें। इसके बाद, भारत की अध्यक्षता में आईसीटी ट्रैक के तहत ‘सुदृढ़ भविष्य के लिए नवाचार, सहयोग और बदलाव (आईसीटी)’ विषय पर ब्रिक्स संचार मंत्रियों की एक मंत्री-स्तरीय ‘अनौपचारिक चर्चा हुई।

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