मुर्गी पालन को आय का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही महिलाएं
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 21 सितम्बर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उनकी आजीविका मजबूत करने पर जोर दे रही है। सरकारी योजनाओं, विभागीय सहयोग और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पौड़ी विकासखंड के ग्राम भैंसवाड़ा और पैडुल की महिलाएं मुर्गी पालन को आय का जरिया बनाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। भैंसवाड़ा की जय मंगला देवी स्वयं सहायता समूह की पांच महिलाओं ने वर्ष 2021 में मुर्गी पालन शुरू किया। वर्तमान में समूह के पास करीब 300 अंडा देने वाली मुर्गियां हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 150 अंडों की आपूर्ति होती है। साथ ही करीब 500 ब्रॉयलर मुर्गियों का पालन किया जा रहा है। समूह स्थानीय बाजार के साथ श्रीनगर स्थित एसएसबी को भी मुर्गियां उपलब्ध कराता है। एसएसबी प्रत्येक बुधवार को करीब 80 से 100 किलोग्राम मुर्गियां खरीदती है। इससे समूह को प्रतिमाह करीब 25 से 30 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। पैडुल की नैना देवी स्वयं सहायता समूह की तीन महिलाओं ने करीब छह माह पहले ब्रॉयलर पालन शुरू किया। वर्तमान में समूह के पास करीब 1000 मुर्गियां हैं और प्रतिदिन लगभग 150 किलोग्राम मुर्गियों की स्थानीय बाजार में आपूर्ति की जा रही है। इससे प्रतिमाह करीब 17 से 20 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि ब्रॉयलर फार्म योजना के तहत समूह की तीन महिलाओं को 60 हजार रुपये का सहयोग दिया गया है, जिसमें 45 हजार रुपये ब्रॉयलर मुर्गियों और 15 हजार रुपये मुर्गी बाड़े की मरम्मत के लिए हैं। हिमोत्थान के ब्लॉक मिशन मैनेजर विजय बिष्ट ने बताया कि भैंसवाड़ा में हैचरी मशीन और ब्रूडिंग के लिए सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। पैडुल में तीन महिलाओं को 20-20 हजार रुपये का सहयोग दिया गया है। समूह एक दिन के चूजे खरीदता है, जिन्हें तैयार होने में करीब 32 दिन लगते हैं और एक ब्रॉयलर का वजन करीब दो किलोग्राम तक हो जाता है।
भैंसवाड़ा और पैडुल की महिलाएं स्थानीय संसाधनों, सरकारी योजनाओं और सामूहिक प्रयासों से गांव में ही रोजगार और आय के स्थायी अवसर तैयार कर रही हैं। मुर्गी पालन अब उनके परिवार की आय और आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है।
