विपक्ष के खिलाफ सरकार की तानाशाही कार्रवाई की कड़ी निंदा
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) उत्तराखंड राज्य कमेटी देश में बढ़ती दमनकारी स्थिति, लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन तथा विपक्ष के खिलाफ सरकार की तानाशाही कार्रवाई की कड़ी निंदा करती है। आज 10 अक्टूबर 026, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार के इस्तीफे -मोदी और अमित शाह के खिलाफ देशव्यापी जन्तर मन्तर नई दिल्ली में क्षविरोध प्रदर्शनों के दौरान हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया और बर्बर लाठीचार्ज किया गया। इन गिरफ्तारियों में सीपीएम महासचिव, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार, कामरेड बृन्दा करात सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल हैं। उत्तराखंड से भी पार्टी के राज्य प्रर्वेक्षक एवं पोलिट ब्यूरो मेम्बर कामरेड बीजू कृष्णन, पार्टी केन्दीय कमेटी सदस्य कामरेड राजेन्द्र सिंह नेगी, एस एफ आई राज्य अध्यक्ष नितिन मलेठा सहित कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
सीपीआई(एम) उत्तराखंड राज्य कमेटी इस अमानवीय, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक कार्रवाई की घोर निंदा करती है। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, और इसे बलपूर्वक दबाना सरकार की डर और अस्थिरता को उजागर करता है। यह लोकतंत्र की हत्या का प्रयास है। पार्टी यह मांग करती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाया जाए। उनके नेतृत्व में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्वायत्तता पर गंभीर सवाल उठे हैं। ज्ञानेश कुमार को जाना होगा, क्योंकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को कमजोर कर रहे हैं। हम मोदी सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि जनता और विपक्ष के खिलाफ इस तरह की दमनकारी कार्रवाई की कीमत उसे चुकानी होगी। देश का विपक्ष मोदी और अमित शाह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेशकुमार के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है, और जनता के गुस्से को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। पार्टी सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील करती है कि वे शांति और संयम बनाए रखें, लेकिन लोकतंत्र, संविधान और जनहित की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखें। हम इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक कि लोकतांत्रिक अधिकार बहाल नहीं हो जाते और जनता की सरकार वापस नहीं आ जाती। आज पार्टी की बैठक में राज्यसचिव राजेंद्र पुरोहित, सचिव मण्डल के इन्दुनौडियाल, शिवप्रसाद देवली, भूपालसिंह रावत, लेखराज, अनन्त आकाश, माला गुरूंग आदि ने विचार व्यक्त किये।
