सीपीएम उत्तराखंड ने की निंदा
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 11 अक्टूबर। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) उत्तराखंड राज्य कमेटी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध के दौरान सीपीएम नेताओं की हिरासत और केरल में पार्टी के खिलाफ “राजनीतिक मामलों” की कड़ी निंदा की है। मुख्य बिंदु: दिल्ली पुलिस द्वारा पिनाराई विजयन, माणिक सरकार पूर्व मुख्यमंत्री, पार्टी महासचिव एम.ए. बेबी, पार्टी नेता बृंदा करात, कामरेड जॉन ब्रिटास सहित अन्य नेताओं-कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना अनुच्छेद 19(1) के तहत अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का उल्लंघन है। ·राज्य कमेटी ने गिरफ्तार आन्दोलनकारियों की तत्काल रिहाई और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। केरल में सीएमआरएल-एक्सालॉजिक मामले, विजिलेंस केस आदि को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया गया। उत्तराखंड से जुड़ी मांगें: पलायन रोकने की ठोस नीति, किसानों को लागत के अनुसार मुनाफा, मनरेगा में पर्याप्त बजट, स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता, जल-जंगल-जमीन पर स्थानीय समुदायों का अधिकार, महिलाओं-दलितों-अल्पसंख्यकों-आदिवासियों की सुरक्षा और चुनाव आयुक्त की स्वायत्तता सुनिश्चित की जाए। राज्य कमेटी ने सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और जनवादी ताकतों से संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है।
