सेक्रेड हार्ट स्कूल घोलतीर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

रुद्रप्रयाग।  राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशों के अनुपालन में, उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के मार्गदर्शन तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जनपद न्यायाधीश, रुद्रप्रयाग के निर्देशानुसार, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रुद्रप्रयाग श्रीमती पायल सिंह की अध्यक्षता में ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के तृतीय दिवस पर सेक्रेड हार्ट स्कूल, घोलतीर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। 31 अक्टूबर तक संचालित इस विशेष अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विधिक अधिकारों, बाल संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों तथा किसी भी प्रकार के शोषण, दुर्व्यवहार एवं उत्पीड़न से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है। अभियान के अंतर्गत जनपद के विभिन्न विद्यालयों में विद्यार्थियों को जागरूक कर उन्हें सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रमुख प्रावधानों के संबंध में जागरूक किया गया। बच्चों को उनकी आयु एवं समझ के अनुरूप सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, अपने शरीर की सुरक्षा तथा किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा किसी विश्वसनीय वयस्क को इसकी जानकारी देने के महत्व के बारे में बताया गया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि किसी भी प्रकार के शोषण अथवा दुर्व्यवहार की स्थिति में चुप रहने के बजाय अपनी बात साझा करना और समय पर सहायता प्राप्त करना आवश्यक है। इस अवसर पर सचिव द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों को उनके अधिकारों तथा POCSO अधिनियम के प्रावधानों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, ताकि वे किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार अथवा शोषण की स्थिति में उसे पहचान सकें और बिना किसी भय या संकोच के अपनी बात अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा किसी विश्वसनीय वयस्क के समक्ष रख सकें। उन्होंने कहा कि अभिभावकों एवं शिक्षकों को बच्चों की बातों को गंभीरता से सुनना चाहिए तथा उनके लिए ऐसा सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना चाहिए, जिसमें बच्चे अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण प्रदान करना परिवार, विद्यालय और समाज की साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को POCSO अधिनियम के अंतर्गत बच्चों को प्राप्त कानूनी संरक्षण, बाल यौन अपराधों की रोकथाम तथा ऐसी घटनाओं की जानकारी संबंधित प्राधिकारियों तक पहुंचाने की प्रक्रिया के संबंध में भी जानकारी प्रदान की गई। बच्चों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में रहने, अपनी बात रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। साथ ही, बाल पीड़ितों की पहचान एवं निजता की सुरक्षा तथा बाल-अनुकूल न्यायिक प्रक्रिया के महत्व के संबंध में भी जागरूक किया गया। वर्तमान डिजिटल युग में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें अपनी निजी जानकारी, पासवर्ड एवं व्यक्तिगत तस्वीरें अनजान व्यक्तियों के साथ साझा करने से बचने तथा किसी भी संदिग्ध संदेश, ऑनलाइन धमकी अथवा साइबर उत्पीड़न की स्थिति में उचित सहायता प्राप्त करने के संबंध में जानकारी दी गई। बच्चों को समझाया गया कि ऑनलाइन सुरक्षा भी व्यक्तिगत सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और किसी भी प्रकार की असुरक्षित स्थिति में उन्हें बिना भय अथवा संकोच के अपने अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित प्राधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। अभियान के अंतर्गत बच्चों एवं आमजन को निःशुल्क विधिक सहायता और आपातकालीन सेवाओं के प्रति भी जागरूक किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रुद्रप्रयाग तथा संबंधित विधिक सेवा संस्थाओं के माध्यम से उपलब्ध सहायता एवं मार्गदर्शन के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। आवश्यकता पड़ने पर सहायता प्राप्त करने के लिए 1098-चाइल्ड हेल्पलाइन, 112-पुलिस आपातकालीन सहायता, 1930-साइबर अपराध हेल्पलाइन तथा 15100- निःशुल्क विधिक सहायता हेल्पलाइन के संबंध में भी जानकारी दी गई, ताकि बच्चे एवं आमजन किसी भी आपातकालीन अथवा विधिक समस्या की स्थिति में उचित सहायता प्राप्त कर सकें। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की बच्चों के लिए बाल-अनुकूल विधिक सेवाएँ योजना, 2024 के अंतर्गत बच्चों को विधिक सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के महत्व के संबंध में भी जागरूकता पर बल दिया गया। ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ का मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, बाल यौन अपराधों एवं अन्य प्रकार के शोषण की रोकथाम करना तथा प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में जागरूकता बढ़ाना है। अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यालयों एवं समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। बच्चों की बातों को गंभीरता से सुनना, उनकी समस्याओं को समझना तथा उन्हें समय पर उचित सहायता उपलब्ध कराना बाल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इस अभियान के अंतर्गत 31 अक्टूबर 2026 तक जनपद के विभिन्न विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे*, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक बाल अधिकारों, विधिक संरक्षण एवं सुरक्षित बचपन का संदेश पहुंचाया जा सके।

 

 

 

 

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