सरदार वल्लभभाई पटेल का राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण हर देशवासी के लिए एक आदर्श : अवधेश पंत
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 31 अक्टूबर। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने राष्ट्र की एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखते हुए अपने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प एवं दूरदर्शी नेतृत्व से भारत को एक सूत्र में पिरोने वाले भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें नमन करते हुये कहा की उनकी जयंती को समस्त देशवासी राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप मे मनाते हैं। राष्ट्र के प्रति उनका अटूट समर्पण, अद्वितीय नेतृत्व और अखंड भारत का स्वप्न सदैव हमें प्रेरणा देता रहेगा। हम सभी को उनकी विचारधारा और आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक सशक्त, समृद्ध, आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए संकल्पित होना चाहिये। अवधेश पन्त ने कहा की सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शी नेतृत्व से देश की रियासतों के एकीकरण में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और सशक्त भारत की नींव को मजबूत किया। उनका जीवन हमें यह स्मरण कराता है कि राष्ट्र की शक्ति उसकी एकता में निहित है। इस अवसर पर हम भारत की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करें तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लें। देश की एकता और अखंडता के प्रतीक, आधुनिक भारत के शिल्पकार, महान स्वतंत्रता सेनानी भारत रत्न “लौह पुरुष” सरदार वल्लभभाई पटेलजी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। सरदार पटेल ने 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाकर एक सशक्त भारत की नींव रखी। इस पावन अवसर पर हम सभी राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करते हुए एक सशक्त एवं समरस भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लें।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने कहा की वह महापरिषद की और से राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के शिल्पकार, स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री व उप प्रधानमंत्री, ‘भारत रत्न’ लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 151वीं जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं। अपनी ‘लौह इच्छाशक्ति’ और कूटनीतिक दूरदर्शिता से उन्होंने 560 से अधिक रियासतों को एकता के सूत्र में पिरोकर एक सशक्त देश की नींव रखी। किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष हो या स्वतंत्र भारत की आंतरिक सुरक्षा का ढांचा, उनका राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण हर देशवासी के लिए एक आदर्श है। ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना से ओत-प्रोत उनका पूरा जीवन हमें देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता है।
