August 8, 2026

अनन्त आकाश/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून, 15 मार्च।  ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों की आलोचना की है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति कामरेड लूला ने एक संप्रभु राष्ट्र के रूप कहा वह अपने हितों के लिए अमेरिकी दबाव का सामना कर सकता है, और वैश्विक दक्षिण के देशों (जैसे अरब राष्ट्र और स्पेन) के साथ मिलकर काम कर सकता है। राष्ट्रपति लूला ने अमेरिका को स्पष्ट का संदेश दिया है कि “पुरानी दुनिया खत्म हो गई है, अब नए गठबंधनों और आत्मनिर्भरता का समय है। लूला ने स्पष्ट किया कि ब्राज़ील, अमेरिका का “छोटा बच्चा” नहीं है जो हर आदेश का पालन करे। उन्होंने कथित तौर पर दो मांगों का विरोध किया:  युद्ध में शामिल होना: ट्रम्प चाहते थे कि ब्राज़ील किसी सैन्य संघर्ष (संभवतः यूक्रेन या मध्य पूर्व से जुड़ा हुआ) में हिस्सा ले।

  • स्पेन के साथ व्यापार बाधित करना: अमेरिका चाहता था कि ब्राज़ील स्पेन को खाद्य निर्यात रोक दे, जिसे लूला ने खारिज कर दिया क्योंकि दोनों देशों के बीच मजबूत राजनयिक और व्यापारिक संबंध हैं। उन्होंने ने बताया गया है कि अमेरिका ब्राज़ील से गेहूं, चावल और कॉफी जैसी वस्तुओं का आयात करता है। लूला के इस रुख का संकेत है कि ब्राज़ील ने इन उत्पादों का अमेरिका को निर्यात रोककर या सीमित करके अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल किया है। यह दिखाता है कि ब्राज़ील अपने संसाधनों का उपयोग करके अमेरिकी दबाव का जवाब दे सकता है। लूला ने आरोप लगाया कि अमेरिकी नीति (विशेष रूप से ट्रम्प के कार्यकाल में) का उद्देश्य मध्य पूर्व को लगातार “आपातकाल की स्थिति” में रखना है। उनके अनुसार, इसका मकसद क्षेत्र की संपत्तियों (जैसे तेल) पर नियंत्रण या कब्जा करना आसान बनाना है। यह एक आम आलोचना है कि महाशक्तियां संसाधनों के लिए संघर्ष वाले क्षेत्रों में अस्थिरता को बढ़ावा देती हैं। लूला ने सभी अरब देशों से एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये देश आत्मनिर्भर हैं और उन्हें अमेरिका या बाहरी ताकतों की जरूरत नहीं है। यह एक प्रकार का दक्षिण-दक्षिण सहयोग का संदेश है, जहां विकासशील या क्षेत्रीय शक्तियां महाशक्तियों के दबाव से बचने के लिए एक-दूसरे का समर्थन करें। सबसे महत्वपूर्ण बात, लूला ने कहा कि अब अमेरिका “अपने इतिहास में पहली बार कठिन दौर से गुजर रहा है” और “मदद मांग रहा है।” यह एक बड़ा बयान है, जो दर्शाता है कि ब्राज़ील जैसे देश अब अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया के बजाय एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था देख रहे हैं, जहां उनकी अपनी स्वायत्तता और ताकत है।

लेखक अनंत आकाश सीपीआई (एम) के सचिव हैं।

 

Don't Miss

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *