बंगाल चुनाव में वाममोर्चे की रणनीतिक वापसी: जहाँ हार में भी जीत की महक : अनन्त आकाश

अनन्त आकाश/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 06 मई। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने वाममोर्चे को एक नई दिशा दी है। हालाँकि सत्ता की ओर वापसी अभी दूर है, लेकिन जमीनी स्तर पर वोटों का गणित बताता है कि बाएँ खेमे ने संघर्ष की नई ज़मीन तैयार कर ली है। मोर्चे ने दो सीटों पर जीत दर्ज करते हुए पाँच सीटों पर शानदार दूसरा स्थान हासिल किया, और 57 विधानसभा क्षेत्रों में 20 हज़ार से अधिक वोट बटोरे।
अकेले भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 36 सीटों पर 20 हज़ार वोटों का आँकड़ा पार किया, जबकि उसके सहयोगी भारतीय सेकुलर फ्रंट (ISF) ने 21 सीटों पर यह उपलब्धि हासिल की। वाममोर्चा 96 सीटों पर 10 हज़ार से अधिक वोट प्राप्त करने में सफल रहा, और 14 सीटों पर दस हज़ार वोटों के करीब पहुँच गया।
मुर्शिदाबाद में चमका लाल सितारा
मुर्शिदाबाद ज़िले की डोमकल सीट पर सीपीआई(एम) के मुस्तफ़िज़ुर रहमान ने 1,07,882 वोट लेकर शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के हुमायूँ कबीर को 16,296 मतों के अंतर से पराजित किया। वहीं जलंगी सीट पर सीपीआई(एम) के यूनुस अली खान ने 67,168 वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
जहाँ कम्युनिस्टों ने हार को गौरव में बदला!
भगवानगोला में महमूदुल हसन ने 49,590 वोट लेकर दूसरे स्थान पर धमाकेदार प्रदर्शन किया।
− उत्तरपाड़ा में सीपीआई(एम) की केंद्रीय समिति सदस्य मीनाक्षी मुखर्जी ने 49,820 वोट हासिल कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा पैदा कर दी।
− रानीनगर में जमाल हुसैन ने 48,387 वोटों के साथ दमदार वापसी की।
− खड़ग्राम में ध्रुवज्योति साहा (41,944) और जादवपुर में बिकास रंजन भट्टाचार्य (41,148) ने भी माकपा का परचम लहराया।
− करणदीघी में मुहम्मद शहाबुद्दीन (39,414) और दमदम उत्तर में युवा नेता दिप्सिता धर (38,428) ने अपनी ताकत साबित की।
कुल मिलाकर, सीपीआई(एम) के प्रत्याशियों ने 28,18,360 वोटों का ख़ज़ाना जमा किया, जो यह बताने के लिए काफी है कि ज़मीनी संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ।
ISF की भी जीत! ISF के नौशाद सिद्दीकी ने भाँगड़ सीट पर 1,26,555 वोटों के साथ अपना किला बचाए रखा। इसके अलावा, ISF कैनिंग पुर्वा, देगंगा और हड़ोआ विधानसभा क्षेत्रों में उपविजेता रही। यह साफ संकेत है कि वाममोर्चा ने बंगाल में सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एक वैकल्पिक राजनीति की नींव रखी है — भले ही यह जीत से कम, पराजय से कहीं अधिक हो।
लेखक अनन्त आकाश सीपीआई (एम) देहरादून के सचिव हैं.

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