देहरादून रेलवे स्टेशन : आज़ादी से पहले ब्रिटिश दौर की रेल विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। आज़ादी से पहले का देहरादून रेलवे स्टेशन केवल आवागमन का साधन नहीं था, बल्कि ब्रिटिश शासन के दौर में दून घाटी के सामाजिक, प्रशासनिक और आर्थिक जीवन का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था। हरिद्वार से देहरादून तक रेल संपर्क स्थापित होने के बाद इस स्टेशन ने देहरादून को उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार देहरादून तक रेल लाइन के निर्माण का कार्य उन्नीसवीं सदी के अंतिम वर्षों में हुआ और 1 मार्च 1900 को हरिद्वार–देहरादून रेल सेवा नियमित रूप से शुरू हुई। उस समय रेल यात्रा आज की तरह सामान्य सुविधा नहीं थी। भाप से चलने वाले इंजन, लोहे के भारी डिब्बे और स्टेशन पर गूंजती सीटी उस दौर की आधुनिकता और औपनिवेशिक शासन की तकनीकी व्यवस्था का प्रतीक हुआ करती थी।
ब्रिटिश स्थापत्य की झलक :- आज़ादी से पहले स्टेशन परिसर और उससे जुड़ी रेलवे संरचनाओं में औपनिवेशिक स्थापत्य की स्पष्ट छाप दिखाई देती थी। लाल ईंटों से निर्मित भवन, बड़े लोहे के शेड, मेहराबदार संरचनाएं तथा रेलवे से जुड़े कार्यालय उस समय की निर्माण शैली की पहचान थे।
रेलवे स्टेशन के आसपास ब्रिटिश अधिकारियों और रेलवे कर्मचारियों के लिए क्वार्टर तथा कार्यालय भी बनाए गए थे। इस पूरे क्षेत्र में ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था और रेलवे तंत्र का प्रभाव दिखाई देता था।
दून और मसूरी का प्रवेश द्वार :- रेल संपर्क शुरू होने के बाद देहरादून रेलवे स्टेशन की महत्ता तेजी से बढ़ी। देहरादून आने वाले ब्रिटिश अधिकारी, सैनिक, कर्मचारी और अन्य यात्री रेल मार्ग से यहां पहुंचते थे। मसूरी जाने वाले यात्रियों के लिए भी देहरादून एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उस दौर में दून घाटी और मसूरी का प्राकृतिक सौंदर्य ब्रिटिश अधिकारियों तथा देश-विदेश से आने वाले यात्रियों के आकर्षण का केंद्र था। रेलवे ने इस क्षेत्र की आवाजाही को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम बना दिया।
जब स्टेशन पर गूंजती थी भाप इंजन की सीटी :- कल्पना कीजिए उस दौर के देहरादून रेलवे स्टेशन की-प्लेटफॉर्म पर खड़े भाप इंजन से निकलता धुआं, इंजन की तेज सीटी, लाल ईंटों की इमारत और यात्रियों की चहल-पहल। रेलवे कर्मचारी अपनी वर्दी में व्यस्त रहते थे और ट्रेन के आने-जाने की गतिविधियों से स्टेशन जीवंत बना रहता था। उस समय रेल केवल यात्रा का साधन नहीं थी, बल्कि ब्रिटिश भारत में बदलती तकनीक और परिवहन व्यवस्था का प्रतीक भी थी।
इतिहास से वर्तमान तक :-वर्ष 1900 में शुरू हुई रेल सेवा ने देहरादून के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समय के साथ रेलवे स्टेशन ने अनेक परिवर्तन देखे। ब्रिटिश शासन समाप्त हुआ, देश स्वतंत्र हुआ और रेलवे व्यवस्था भारतीय प्रशासन के अधीन आ गई। स्टेशन और उसके आसपास का स्वरूप भी समय के साथ बदलता गया। आज देहरादून रेलवे स्टेशन आधुनिक यातायात व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है, लेकिन इसके इतिहास में ब्रिटिश काल की वह रेल विरासत अब भी दर्ज है, जब दून घाटी तक रेल पहुंचना अपने आप में एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाता था। देहरादून रेलवे स्टेशन की कहानी केवल एक रेलवे स्टेशन की कहानी नहीं है। यह दून घाटी में आधुनिक परिवहन के आगमन, औपनिवेशिक दौर की स्थापत्य विरासत और स्वतंत्र भारत तक पहुंची एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा की कहानी भी है।
