पहली उच्च-मूल्य वाली गहन प्रौद्योगिकी परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली, 25 सितम्बर। प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) योजना के तहत, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने क्वांटम अनुप्रयोगों के लिए 20 मिलीकिलोमीटर तनुकरण रेफ्रिजरेटर के स्वदेशी विकास हेतु औद्योगिक (स्टार्ट-अप) जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ पहला उच्च-मूल्य वाला डीप टेक प्रोजेक्ट समझौता किया है। समझौते पर हस्ताक्षर नई दिल्ली में टीडीएफ के निदेशक और जीरो एमके इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, अलवर, राजस्थान के बीच हुए। यह 500 करोड़ रुपये के उस कोष के तहत किया गया पहला उच्च-मूल्य वाला समझौता है, जिसे रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने पहले ही डीप-टेक और अत्याधुनिक परियोजनाओं के लिए मंजूरी दे दी थी। डाइल्यूशन रेफ्रिजरेटर विशेष प्रकार के क्रायोजेनिक सिस्टम होते हैं जो मिलीकेल्विन रेंज में अत्यंत कम तापमान प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। इस प्रकार का अति-निम्न तापमान वातावरण कई क्वांटम कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म और संबंधित क्वांटम प्रौद्योगिकियों के संचालन और परीक्षण के लिए आवश्यक है। 20 mK श्रेणी के तनुकरण रेफ्रिजरेटर का स्वदेशी विकास राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप है और क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत क्रायोजेनिक्स और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करता है, जिससे आत्मनिर्भर और क्वांटम-तैयार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में योगदान मिलता है। इससे आयातित क्रायोजेनिक अवसंरचना पर निर्भरता कम करने और घरेलू क्वांटम प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण परियोजना से जुड़े डीआरडीओ, उद्योग जगत और सभी हितधारकों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भविष्य के डीआरडीओ-उद्योग सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगी। इस पहल से जुड़ी टीमों को बधाई देते हुए रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष श्री राजेश कुमार सिंह ने परियोजना के उद्देश्यों को प्राप्त करने में उनकी सफलता की कामना की। इस अवसर पर सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं कम्प्यूटेशनल सिस्टम एवं साइबर सुरक्षा के महानिदेशक (डीजी एमसीसी), प्रौद्योगिकी प्रबंधन के महानिदेशक (डीजी टीएम), ठोस अवस्था भौतिकी प्रयोगशाला के निदेशक (एसएसपीएल) और अन्य हितधारक उपस्थित थे। इस परियोजना की निगरानी, मार्गदर्शन और सहायता एसएसपीएल के निदेशक और उनकी टीम द्वारा की जा रही है।
