महान क्रांतिकारी व स्वतंत्रता के अमर सेनानी शहीद गुलाब सिंह लोधी के बलिदान दिवस पर नमन
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 23 अगस्त। अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी थे। उन्होंने 23 अगस्त 1935 को लखनऊ के अमीनाबाद (झंडेवाला) पार्क में अंग्रेजों की सख्त पाबंदी और घेराबंदी को पार कर पेड़ पर चढ़कर तिरंगा फहराया था। तिरंगा फहराते समय एक ब्रिटिश अधिकारी की गोली से वे मात्र 32 वर्ष की आयु में शहीद हो गए।
महान क्रांतिकारी व स्वतंत्रता के अमर सेनानी ठा. गुलाब सिंह लोधी भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे, जिन्होने अपने प्राणों की बाजी अपनी भारत माँ को आजादी दिलाने के लिए लगा दी। लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में झण्डा सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान झण्डा फहराने के दौरान अंग्रेजी पुलिस ने उन पर गोली चला दी और वे शहीद हो गये। ठा. गुलाब सिंह लोधी का जन्म एक राजपूत किसान परिवार में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ग्राम चन्दीकाखेड़ा (फतेहपुर चैरासी) के लोधी क्षत्रिय परिवार में सन् 1903 में ठाकुर श्रीराम रतनसिंह लोधी के यहां हुआ था। इनके पिताजी उन्नाव के एक प्रसिद्ध एवं प्रतिष्टित जमींदार थे। झण्डा सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लेने उन्नाव जिले के कई सत्याग्रही जत्थे गये थे, परन्तु सिपाहियों ने उन्हें खदेड दिया और ये जत्थे तिरंगा झंडा फहराने में कामयाब नहीं हो सके। इन्हीं सत्याग्रही जत्थों में शामिल वीर गुलाब सिंह लोधी किसी तरह फौजी सिपाहियों की टुकडि़यों के घेरे की नजर से बचकर अमीनाबाद पार्क में घुस गये और चुपचाप वहां खड़े एक पेड़ पर चढ़ने में सफल हो गये। क्रांतिवीर ठा. गुलाब सिंह लोधी के हाथ में डंडा जैसा बैलों को हांकने वाला पैना था। उसी पैना में तिरंगा झंडा लगा लिया, जिसे उन्होंने अपने कपड़ों में छिपाकर रख लिया था। क्रांतिवीर ठा. गुलाब सिंह लोधी ने तिरंगा फहरा दिया और नारे लगाये। अमीनाबाद पार्क के अन्दर पर तिरंगे झंडे को फहरते देखकर पार्क के चारों ओर एकत्र हजारों लोग एक साथ गरज उठे और गगनभेदी नारों से पार्क गूंज उठा।
झंडा सत्याग्रह आन्दोलन के दौरान भारत की हर गली और गांव शहर में सत्याग्रहियों के जत्थे आजादी का अलख जगाते धूम रहे थे। समय का चक्र देखिए कि क्रांतिवीर ठा0 गुलाब सिंह लोधी के झंडा फहराते ही सिपाहियों की आंख फिरी और अंग्रेजी साहब का हुकुम हुआ, गोली चलाओ, कई बन्दूकें एक साथ ऊपर उठी और गोलियां क्रांतिवीर सत्याग्रही ठा. गुलाब सिंह लोधी को जा लगी। जिसके फलस्वरूप वह घायल होकर पेड़ से जमीन पर गिर पड़े। इस प्रकार वह आजादी की बलिवेदी पर अपने प्राणों को न्यौछावर कर 23 अगस्त 1935 को शहीद हो गये। क्रांतिवीर ठा0 गुलाब सिंह लोधी के तिरंगा फहराने की इस क्रांतिकारी घटना के बाद ही अमीनाबाद पार्क को लोग झंडा वाला पार्क के नाम से पुकारने लगे और वह आजादी के आन्दोलन के दौरान राष्ट्रीय नेताओं की सभाओं का प्रमुख केन्द्र बन गया, जो आज शहीद ठा. गुलाब सिंह लोधी के बलिदान के स्मारक के रूप में सामने है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय अग्रणी भूमिका निभाने के लिए उनकी याद में केंद्र सरकार द्वारा जनपद उन्नाव जनपद में 23 दिसंबर 2013 को डाक टिकट जारी किया गया।
जीवन परिचय और शहादत
जन्म: सन 1903 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के फतेहपुर चौरासी स्थित चंदिका खेड़ा गांव में एक किसान परिवार में हुआ था।
माता-पिता: पिता का नाम ठाकुर राम रतन सिंह लोधी था।
बलिदान की तिथि: 23 अगस्त 1935
स्थान: झंडेवाला पार्क, अमीनाबाद, लखनऊ
ऐतिहासिक महत्व और सम्मान
झंडेवाला पार्क: उनके तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक घटना के बाद ही अमीनाबाद पार्क को ‘झंडेवाला पार्क’ के रूप में नई पहचान मिली।
डाक टिकट: उनके अदम्य साहस को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने 23 दिसंबर 2013 को उन पर एक विशेष डाक टिकट जारी किया।
स्मृति और सम्मान: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उनकी याद में उन्नाव जिले में पार्क, स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस लाइन जैसी जगहों का नामकरण किया गया है।
