“सेनानी परिवारों के हक से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं : अवधेश पन्त
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महा परिषद ने उत्तराखंड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्रों के कथित दुरुपयोग एवं उनके आधार पर आरक्षण तथा शैक्षणिक/सरकारी सेवाओं में लाभ प्राप्त किए जाने संबंधी शिकायतों को अत्यंत गंभीर विषय बताया है।
महा परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री अवधेश पन्त ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवारों को प्राप्त आरक्षण एवं अन्य सुविधाएं उनके पूर्वजों द्वारा देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए त्याग, संघर्ष और बलिदान के सम्मानस्वरूप प्रदान की गई हैं। यदि फर्जी अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के माध्यम से अपात्र व्यक्तियों को सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्र जारी किए गए हैं, तो इससे वास्तविक सेनानी परिवारों के बच्चों के शिक्षा, रोजगार और भविष्य के संवैधानिक अधिकार सीधे प्रभावित हो सकते हैं। हाल में सामने आई शिकायतों एवं परिषद द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को दिए गए पत्र के संदर्भ में श्री पन्त ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच में केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने वाले व्यक्तियों तक सीमित न रहकर प्रमाण-पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया, संबंधित अभिलेखों और जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
महा परिषद की प्रमुख मांगें :- 2023 से अब तक जारी सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्रों का विशेष सत्यापन कराया जाए तथा उन्हें मूल सरकारी अभिलेखों से मिलाया जाए। इसी अवधि में जारी सभी संबंधित डोमिसाइल/स्थायी निवास प्रमाण-पत्रों की भी जांच कराई जाए, विशेष रूप से उन मामलों की जिनके आधार पर सेनानी कोटे अथवा आरक्षित सीटों का लाभ लिया गया है। जिन व्यक्तियों ने गलत, फर्जी अथवा संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर लाभ प्राप्त किया हो, उनके मामलों की कानून एवं नियमानुसार जांच कर लाभ की वैधता निर्धारित की जाए। प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, बिचौलिए अथवा अन्य व्यक्ति की मिलीभगत या लापरवाही जांच में प्रमाणित होती है, तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक एवं आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। MBBS सहित सरकारी नौकरियों एवं अन्य शैक्षणिक प्रवेशों में सेनानी कोटे के अंतर्गत लाभ लेने वाले मामलों का भी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए। भविष्य में फर्जीवाड़े की संभावना रोकने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण-पत्रों की ऑनलाइन/इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन व्यवस्था विकसित की जाए। जांच की प्रगति तथा निष्कर्ष से वास्तविक स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को अवगत कराया जाए और जांच में दोष सिद्ध होने पर की गई कार्रवाई सार्वजनिक की जाए।
श्री अवधेश पन्त ने कहा कि परिषद किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन वास्तविक स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि प्रमाण-पत्रों की आड़ में अपात्र लोगों को आरक्षण या अन्य सरकारी लाभ मिला है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक सेनानी परिवारों के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय न हो। उन्होंने उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण को समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच के अधीन लाकर दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए तथा वास्तविक स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए।
