संस्कृत ज्ञान-परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाएं : राज्यपाल
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून18 सितम्बर। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को उज्जैन स्थित महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने संस्कृत भाषा एवं वैदिक परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विद्वानों को सम्मानित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की सनातन ज्ञान-परंपरा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की शक्ति है। हमें अपनी समृद्ध ज्ञान-संपदा को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना होगा। संस्कृत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, मंत्रों और श्लोकों के शुद्ध उच्चारण को सुरक्षित रखने तथा कठिन ग्रंथों के अध्ययन और व्याख्या को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में एआई और आधुनिक तकनीक उपयोगी सिद्ध हो सकती है। राज्यपाल ने मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड के बीच शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के साथ उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय और दून विश्वविद्यालय के हिन्दू अध्ययन विभाग के बीच प्रस्तावित शैक्षिक एवं अनुसंधान सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच संवाद, संयुक्त शोध तथा तकनीक के माध्यम से भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रसार से दोनों क्षेत्रों के बीच सार्थक ज्ञान-संगम स्थापित होगा। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा “ज्ञान भारतम” जैसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की पांडुलिपियों में देश की स्मृति, ज्ञान, विज्ञान और दर्शन की समृद्ध परंपरा सुरक्षित है। इनका सर्वेक्षण, संग्रह, संरक्षण और डिजिटलीकरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। विश्वविद्यालय के ‘संस्कृत गौरव ग्रंथ व्याख्यान-माला’ के माध्यम से महाभारत, रामायण, अर्थशास्त्र और नाट्यशास्त्र जैसे ग्रंथों को जनसामान्य तक पहुंचाने के प्रयास की भी उन्होंने सराहना की।
