अनंत चतुर्दशी पर भव्य शोभायात्रा, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून। पर्वाधिराज पर्युषण दशलक्षण महापर्व के दसवें दिन अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई तथा श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना कर आत्मशुद्धि का संदेश ग्रहण किया। दशलक्षण महापर्व के दसवें दिन आयोजित कार्यक्रम में देहरादून के अलावा सागर, ललितपुर, टोंगड़गढ़, विदिशा, ऋषिकेश, मध्य प्रदेश, विकासनगर सहित विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया। प्रातःकाल मंदिरों में नित्य नियम पूजन, दशलक्षण पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। अनंत चतुर्दशी के अवसर पर प्रातः 11 बजे जैन भवन, गांधी रोड से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। शोभायात्रा में भगवान श्री जी का रथ, ऐरावत हाथी तथा विभिन्न धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा के मुख्य पात्रों में ख्वासी-राजीव जैन एवं पूनम जैन (देहराखास), कुबेर-संजय जैन (मल्टीचैनल), सारथी-राजेश जैन एवं अर्चना जैन (पारस टावर), इंद्र-मुदित जैन एवं अरिहंत जैन तथा ऐरावत हाथी-प्रमोद जैन (जयपुर) रहे। श्री जी की महाआरती अमित जैन (टर्नर रोड) द्वारा की गई। शोभायात्रा का संचालन वर्षायोग समिति के चेयरमैन राजीव जैन (फोरम हाउस), जैन मिलन पारस एवं वीर विद्या युवा मंडल के सहयोग से किया गया।शोभायात्रा जैन भवन गांधी रोड से प्रारंभ होकर सहारनपुर चौक, झंडा बाजार, अखाड़ा बाजार, मोती बाजार, मिशन स्कूल, सरनीमल बाजार, धामावाला एवं राजा रोड होते हुए पुनः जैन भवन पहुंचकर संपन्न हुई। शहर में विभिन्न स्थानों पर धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और भगवान श्री जी के रथ की आरती की। श्रद्धालुओं ने भगवान के जयकारे लगाए और भजनों पर नृत्य कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर आर्यिका श्री 105 पूर्णमति माताजी ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म दशलक्षण महापर्व का दसवां और अंतिम धर्म है। ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल शारीरिक संयम तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी शुद्ध आत्मा में रमण करना और मन, वचन तथा शरीर से विषय-विकारों से दूर रहना है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य का वास्तविक अर्थ है-‘ब्रह्म अर्थात आत्मा में चर्या करना।’ मन को बुरे विचारों से मुक्त रखना, वाणी में मर्यादा रखना तथा इंद्रियों और इच्छाओं पर संयम रखना भी ब्रह्मचर्य का महत्वपूर्ण स्वरूप है। दिगंबर जैन परंपरा में दशलक्षण पर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, संयम, सादगी और बाहरी आकर्षणों से विरक्ति का संदेश देती है। धर्मशाला पहुंचने के बाद भगवान श्री जी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। इसके पश्चात सायंकालीन महाआरती का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि आर्यिका श्री 105 पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में सामूहिक क्षमावाणी एवं विश्व अहिंसा कार्यक्रम का आयोजन रविवार, 27 सितंबर 2026 को प्रातः 7:30 बजे जैन भवन (जैन धर्मशाला), 60 गांधी रोड, देहरादून में किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक सकल दिगम्बर जैन समाज एवं श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, देहरादून हैं, जबकि कार्यक्रम संयोजक जैन मिलन देहरादून एवं समस्त जैन मिलन परिवार, देहरादून हैं। क्षमावाणी कार्यक्रम से पूर्व जैन मिलन परिवार देहरादून द्वारा आचार्य श्री का पूजन किया जाएगा। इस अवसर पर सकल दिगम्बर जैन समाज, सागर ललित पुर टोंगड गढ़ विदिशा ऋषिकेश मध्यप्रदेश, विकासनगर, उत्तरप्रदेश गाजियाबाद विभिन्न जिलों से एवं श्री विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति, जैन भवन कार्यकारिणी सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी एवं सदस्यगण तथा बड़ी संख्या में बाहर से आए श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी के पावन सान्निध्य में धर्मलाभ प्राप्त किया।

 

 

 

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