देहरादून जिले में कई अत्यंत प्राचीन, चमत्कारी और ऐतिहासिक देवी मंदिर स्थित
संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। देहरादून जिले में कई अत्यंत प्राचीन, चमत्कारी और ऐतिहासिक देवी मंदिर स्थित हैं, जो श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र हैं।
मां संतला देवी मंदिर देहरादून शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर संतूर गढ़ (गढ़ी कैंट,जैंतनवाला के पास) में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। लोक कथाओं के अनुसार, मुगल सेना से अपने सतीत्व की रक्षा करने के लिए नेपाल के राजा की पुत्री राजकुमारी संतला और उनके भाई संतौर सिंह ने यहाँ देवी की शरण ली थी। प्रार्थना करने पर एक दिव्य प्रकाश पुंज प्रकट हुआ और दोनों भाई-बहन पाषाण (पत्थर) की मूर्तियों में परिवर्तित हो गए। यहाँ शनिवार के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है और स्थानीय नेपाली समाज में इस मंदिर की अत्यधिक मान्यता है। मुख्य शहर से जैंतनवाला या पंजाबीवाला गाँव तक गाड़ी से पहुँचा जा सकता है, जिसके बाद नुन नदी के किनारे से लगभग 2 किलोमीटर का खड़ी चढ़ाई वाला सुंदर जंगल ट्रैक पार करके मंदिर तक पहुँचा जाता है।
जय मां डाट काली मंदिर यह सिद्धपीठ देहरादून-सहारनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रसिद्ध आशारोड़ी चेकपोस्ट के पास सुरंग (टनल) के मुहाने पर स्थित है। इस मंदिर की स्थापना 30 जून 1804 को हुई थी। मान्यता है कि जब इस मार्ग पर सड़क व टनल का निर्माण हो रहा था, तब एक इंजीनियर के सपने में आकर मां काली ने स्वयं को प्रकट करने का निर्देश दिया था। देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में इन्हें “वाहन देवी” के रूप में पूजा जाता है। जब भी कोई नया वाहन (कार, बाइक आदि) खरीदता है, तो वह सबसे पहले यहाँ मां के चरणों में सुरक्षा का आशीर्वाद लेने और वाहन पूजा कराने अवश्य आता है। यहाँ अखंड ज्योति निरंतर जलती रहती है।
भवन श्री कालिका माता मंदिर देहरादून शहर के केंद्र में कनॉट प्लेस (मछली बाजार, अंसारी मार्ग) के पास स्थित यह मंदिर यहाँ के सबसे पुराने और जागृत सिद्धपीठों में से एक है। वर्ष 1954 के आसपास 12 वर्षीय पूज्य बाल योगी सर्वदास जी महाराज के मार्गदर्शन में इस दिव्य शक्तिपीठ की पुनस्र्थापना की गई थी। चैत्र और अश्विन नवरात्रि के दौरान यहाँ विशाल ‘शक्ति महा सम्मेलन’ का आयोजन होता है, जिसमें हजारों भक्त आते हैं।
मां कामाख्या देवी मंदिर गुवाहाटी (असम) के मुख्य कामाख्या मंदिर की तर्ज पर यह एक नवनिर्मित लेकिन बेहद खूबसूरत मंदिर है, जो गढ़ी कैंट क्षेत्र के पास गलाजवाड़ी (संतला देवी मार्ग) में स्थित है। यह मंदिर शानदार पहाड़ी वास्तुकला में निर्मित है और यहाँ मां कामाख्या के साथ-साथ मां तारा और मां काली के विग्रह भी स्थापित हैं। यह शांत वातावरण और हरी-भरी वादियों के बीच स्थित है।
चंद्रबनी मंदिर देहरादून-दिल्ली मार्ग पर शहर से लगभग 7 किमी दूर स्थित यह एक और अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है। इसे गौतम कुंड के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान महर्षि गौतम, उनकी पत्नी माता अहिल्या और पुत्री अंजनी (भगवान हनुमान की माता) का निवास स्थान रहा है। शिवालिक की पहाड़ियों के बीच बने इस प्राकृतिक स्थल पर भक्त पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।
