सच लिखना और जनता की आवाज़ उठाना मौत को न्योता देने जैसा
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 30 सितंबर। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने राजधानी देहरादून मे मीडिया कर्मियों से वार्ता करते हुये कहा की उत्तरकाशी के साहसी पत्रकार राजीव प्रताप की रहस्यमयी मौत ने पूरे राज्य को हिला दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा पर गहरी चोट है। राजीव प्रताप ने हाल ही में उत्तरकाशी ज़िला अस्पताल की बदहाली और भ्रष्टाचार पर निर्भीकता से रिपोर्टिंग की थी। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही थी और वीडियो हटाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। सवाल यह है कि जब शासन-प्रशासन को धमकियों की जानकारी थी, तो उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? क्या सरकार की नज़र में एक ईमानदार पत्रकार की जान की कोई कीमत नहीं है? आज हालात ऐसे बन गए हैं कि सच लिखना और जनता की आवाज़ उठाना मौत को न्योता देने जैसा हो गया है। यह केवल राजीव प्रताप की त्रासदी नहीं है, बल्कि उन तमाम पत्रकारों की पीड़ा है जो भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ कलम उठाने का साहस रखते हैं। और सबसे गंभीर बात यह है कि प्रशासन परिवार की आशंकाओं को दरकिनार कर इस घटना को जल्दबाज़ी में हादसा बताने की कोशिश कर रहा है। आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है? क्या सरकार को डर है कि सच्चाई सामने आने से उसकी पोल खुल जाएगी? मैं स्पष्ट कहना चाहता हूँ कि यह मामला किसी साधारण जांच से नहीं सुलझ सकता। जब तक इस प्रकरण की जांच उच्चस्तरीय, तटस्थ और पारदर्शी ढंग से, सीबीआई या विशेष जांच दल की निगरानी में नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आ सकती। कांग्रेस पार्टी की यह माँग है कि सरकार तत्काल ऐसी जांच सुनिश्चित करे और पत्रकारों को मिल रही धमकियों के खिलाफ ठोस कदम उठाए। राजीव प्रताप केवल एक पत्रकार नहीं थे, वे उन असंख्य नागरिकों की आवाज़ थे जिनकी उम्मीदें और जिनकी तकलीफ़ें सत्ता तक पहुँचनी चाहिए थीं। उनकी मौत इस बात की चेतावनी है कि अगर अब भी चुप्पी साधी गई, तो कल हर वह आवाज़ दबा दी जाएगी जो सच कहने का साहस करेगी। कांग्रेस पार्टी उनके परिवार के साथ खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाएगी।
