वाल्मीकि समाज और वंचित जातियों को कब आरक्षण का लाभ मिलेगा : भगवत प्रसाद मकवाना

संदीप गोयल/ एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून, 22 जनवरी। राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा के संस्थापक /राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व निर्देशक एनएचपीसी ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार भगवत प्रसाद मकवाना ने केंद्र और राज्य सरकारों का ध्यान आकर्षित कराते हुए कहां है कि यह चिंतनीय विषय है कि 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान देश में लागू हुआ। संविधान में सदियों से शोषित और वंचित जातीय भेदभाव के शिकार समुदायों को अनुसूचित जाति जनजाति आरक्षण की श्रेणी में सम्मिलित किया गया था किंतु क्या कारण रहे कि अनुसूचित जाति जनजाति आरक्षण का लाभ कुछ वर्ग विशेष को ही प्राप्त हो सका वाल्मीकि समाज और अति दलित जातियां आरक्षण के लाभ से प्रत्येक क्षेत्र में वंचित रहे शिक्षा रोजगार और राजनीतिक क्षेत्र इन सभी में कुछ जातियां विशेष का ही आरक्षण पर प्रभुत्व  रहा है। वाल्मीकि समाज और अनुसूचित जाति के कमजोर जातियां अति वांछित जातियां कब तक आरक्षण के लाभ से वंचित रहेगी यह एक विचारणीय प्रश्न है जिस पर केंद्र और राज्य सरकारों को शीघ्र विचार करने की आवश्यकता है क्योंकि संविधान निर्माता बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी और संविधान सभा के सदस्यों द्वारा जातीय भेदभाव की शिकार सभी जातियों को अनुसूचित जाति और जनजाति का दर्जा देकर उनको विकास हेतु विशेष अवसर आरक्षण के रूप में संविधान में प्रावधान किए गए किंतु सभी जातियों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। वाल्मीकि समाज और अति वांछित जातियों द्वारा पंजाब में जब इस विषय को उठाया गया तब देश में पहली बार 1975 में वाल्मीकि समाज और मजहबी सिक्ख को अनुसूचित जाति का प्रथम आरक्षण सर्वप्रथम पंजाब में लागू हुआ इसके उपरांत हरियाणा में 1994 में भजनलाल सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के आरक्षण की समीक्षा कराई गई जिसमें पाया गया कि अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ 90% एक दो जातियों को ही प्राप्त हो रहा है वाल्मीकि समाज और अति वांछित जातियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया। हरियाणा की तत्कालीन भजनलाल सरकार ने अनुसूचित जाति आरक्षण को ए और बी दो श्रेणियां में विभाजित करके हरियाणा में भी पंजाब की भांति पृथक आरक्षण लागू कर दिया। मकवाना ने कहा कि उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्य मंत्री श्री रामचंद्र वाल्मीकि जी संरक्षक उत्तर प्रदेश वाल्मीकि पृथक आरक्षण संयुक्त संघर्ष समिति भगवत प्रसाद मकवाना प्रदेश संयोजक तथा उत्तर प्रदेश के अनेकों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 1994 से उत्तर प्रदेश में पृथक आरक्षण वाल्मीकि समाज और वंचित जातियों को लागू करने की मांग की। जिसको 8 जुलाई 2001 को शाह ऑडिटोरियम दिल्ली मे आयोजित विशाल वाल्मीकि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश  आदरणीय श्री राजनाथ सिंह जी द्वारा अति दलित अति और अति पिछड़ों को पृथक आरक्षण उत्तर प्रदेश में लागू करने की घोषणा की गई इस निमित्त टी उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री हुकम सिंह की अध्यक्षता में सामाजिक न्याय कमेटी का गठन किया गया जिसने पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा करके आरक्षण की समीक्षा की तथा पंजाब और हरियाणा कि भारतीय उत्तर प्रदेश में भी यही स्थिति सामने आई कि कुछ जातियां ही आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रहे हैं वाल्मीकि समाज और अति दलित जातियां के विकास हेतु सामाजिक न्याय के तहत उत्तर प्रदेश में भी अति दलित अति पिछड़ों के लिए अलग-अलग आरक्षण लागू किया गया 2004 में आंध्र प्रदेश में भी इसी प्रकार अलग-अलग आरक्षण लागू किया गया किंतु 2004 में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकार के आरक्षण को समानता के अधिकार के विरुद्ध मानते हुए ऐसे आरक्षण को रोक लगा दी गई। किंतु समाज के कुछ जागरूक अधिवक्ताओं द्वारा जिसमें दिल्ली के डॉक्टर ओपी शुक्ला जी जो वाल्मीकि समाज से संबंधित है आदि द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा 6:1 की सहमति से ऐतिहासिक निर्णय दिया गया कि अनुसूचित जाति जनजाति के आरक्षण को राज्य सरकार वर्गीकरण लागू कर सकती हैं तथा क्रिमी लेयर भी लागू किया जा सकता है। अर्थात वंचित जातियां को आरक्षण अलग से दिया जा सकता है। मकवाना ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले के आने के बाद वाल्मीकि समाज सहित सभी अति वांछित जातियों द्वारा सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त करते हुए सरकारों से एक बार पुनः मांग की जाने लगी है कि सुप्रीम कोर्ट के 1 अगस्त 2024 के फैसले के अनुसार वाल्मीकि समाज और आरती दलित जातियों को पृथक आरक्षण लागू किया जाए इसी निर्णय के अनुसार हरियाणा की भाजपा सरकार ने वाल्मीकि समाज और वंचित जातियों को अलग-अलग आरक्षण पुनः लागू कर दिया है इसके लिए मुख्यमंत्री श्री सैनी जी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने सामाजिक न्याय की आवश्यकता को समझा तथा वंचित जातियों को न्याय प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक आदेश जारी किए तेलंगाना में भी कैबिनेट ने ऐसा ही निर्णय पारित किया है इसके लिए वहां की सरकार भी बधाई की पात्र है।

उत्तर प्रदेश में कुछ वर्षों पूर्व एक कमेटी का गठन करके अनुसूचित जाति जनजाति और पिछड़े वर्ग के आरक्षण के बारे में अपनी रिपोर्ट पेश करने के आदेश किए थे किंतु कमेटी की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भागवत प्रसाद मकवाना ने कहा कि वाल्मीकि मोर्चा का गठन इस मुद्दे को लेकर हुआ था कि वाल्मीकि समाज और अति दलित जातियों को अनुसूचित जातियों के लिए निर्धारित आरक्षण में से 50% पृथक आरक्षण लागू किया जाए इसके लिए अनेकों रेलिया सम्मेलन धरना प्रदर्शन आयोजित किए गए अन्य संगठन भी इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रहे हैं किंतु केंद्र और राज्य की सरकार अभी तक इसमें निर्णय नहीं ले पाए हैं यह एक विचारणीय विषय है आखिर केंद्र और राज्य सरकार कव्वाली की समाज और वंचित जातियों को आरक्षण का लाभ सामाजिक न्याय के रूप में प्रदान करेंगी। यह बहुत ही विचारणीय विषय है मकवाना ने केंद्र और राज्य सरकारों से पुरजोर मांग की है कि अनुसूचित जातियों के आरक्षण की समीक्षा करके वाल्मीकि समाज और अति दलित जातियों को पृथक आरक्षण लागू करके इन वर्गों को भी विकास का मौका दिया जाए अभी तक शिक्षा रोजगार और राजनीतिक आरक्षण से वाल्मीकि समाज और अतीत दलित जातियां वंचित हैं। मकवाना ने कहा कि आगामी 8 फरवरी 2026 में देहरादून में राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा के 29 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित वाल्मीकि स्वाभिमान सम्मेलन में वाल्मीकि समाज और वंचित जातियों को आरक्षण पृथक रूप से लागू किए जाने की मांग तथा सफाई कर्मियों को ठेकेदारी से मुक्ति दिलाने, वर्षों से दैनिक वेतन संविदा और आउटसोर्स में कार्य करने वाले सफाई कर्मियों को नियमितीकरण किए जाने, सफाई कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी, सफाई कर्मचारियों की नई स्थाई भर्ती किए जाने, सफाई कर्मचारी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की मांग मजबूती से उठाई जाएगी। मकवाना ने समाज के सभी संगठनों एवं एवं सामाजिक जागरूक नागरिकों से इन मुद्दों पर समाज को जागरूक करने एवं सरकार के सम्मुख इन मांगों को प्रमुखता से रखने की आवश्यकता है। मकवाना ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस संवेदनशील सामाजिक न्याय की मांग को शीघ्र पूरा करने की पुरजोर मांग की है।

 

 

 

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