वृक्षाबंधन अभियान की विमर्श श्रृंखला के 8वें संस्करण में हुआ गम्भीर मन्थन

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

हरिद्वार। वृक्षाबंधन अभियान द्वारा आयोजित विमर्श श्रृंखला भाग VIII संस्करण में आज हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून से आए प्रबुद्ध पर्यावरण विदों, समाज सेवियों एवं राज्य आंदोलनकारियों ने हरिद्वार स्थित अटल बिहारी वाजपेई राज्य अतिथि गृह सभागार में भागीदारी प्रदान कर गम्भीर मंथन किया।

विमर्श श्रृंखला की अध्यक्षता मेजर जनरल (अवकाश प्राप्त) कुँवर दिग्विजय सिंह द्वारा संपन्न हुई। जबकि विमर्श श्रृंखला में मुख्य वक्ता मातृ सदन के स्वामी श्री शिवानंद जी महाराज रहे। विमर्श श्रृंखला में विशिष्ट वक्ताओं में *संयुक्त राष्ट्र द्वारा पुरस्कृत पर्यावरण विद डॉ विनोद प्रसाद जुगलाण, अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यान कर्ता देवेन्द्र कैंथोला, डॉ राधिका नागरथ, लाल बहादुर प्रशासनिक अकादमी के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बलवंत सिंह नेगी और शिक्षा विद लक्ष्मण सिंह चौहान, अभय कुमार रहे। विमर्श श्रृंखला में भागीदारी करने वाले अन्य वक्ताओं में अभय कुमार, वृक्षाबंधन अभियान के संस्थापक ‘शिरोमणि’ मनोज ध्यानी, ऋषिकेश से आए उद्यमी विशाल गौरव, श्रीमती कुसुम जोशी, श्रीमती संध्या जोशी, राज्य आंदोलनकारी राजेश शर्मा,  चिंतन सकलानी, डॉ धीरेन्द्र रांगड़, श्रीमती कुसुम जोशी, हरिद्वार से मातृ सदन से ब्रह्मचारी अद्भुदानंद,  मातृ सदन से ब्रह्मचारी सदानंद, श्रीमती नेहा मालिक, वरुण बालियांन, सखा ट्रस्ट के देव सिंह, आयोजनकर्ता संगठन वृक्षाबंधन अभियान की युवा प्रकोष्ठ की संयोजिका अर्चना नेगी, हरिद्वार विमर्श श्रृंखला के युवा संयोजक समाजसेवी आकाश ऋतुराज भारतीय , दून विश्विद्यालय की अर्थशास्त्र संवर्ग से दिया इंदिरा ध्यानी,  तकनीकी दक्षता धारक वृक्षाबंधन अभियान के सचिव अरुणादित्य ध्यानी सुदीक्षा शाह समेत अनेकों गणमान्य बुद्धिजीवियों ने सशक्त भागीदारी प्रदान की।

मातृ सदन के स्वामी श्री शिवानंद जी ने नदी की परिभाषा क्या होती है, इस पर विस्तृत रूप में प्रकाश डालते हुए नदियों को अविरल बहने के सिद्धांत पर शास्त्र सम्मत बातें विमर्श श्रृंखला में रखीं। शिवानंद जी महाराज ने कहा कि यदि नदियों को हम मां की तरह पूजा करेंगे, तो हमारा भी संरक्षण होगा अन्यथा सर्वथा विनाश उत्पन्न हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में साधु संत समाज गंगा की स्वच्छता के लिए अत्यंत सक्रिय हुआ करता था एवं जरा सी भी त्रुटि होने पर मोर्चा संभाल लेता था; परंतु आज की तारीख में वह निष्क्रिय और निष्प्राण सा नजर आता है। उन्होंने कावड़ मेला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, इस बात पर जोर दिया की इसको पौराणिक रीति के अनुसार ही संपन्न किया जाना चाहिए। ना कि आज के युग में आडम्बर के अनुसार संपादित होना चाहिए। उन्होंने इसके लिए विस्तार से परशुराम से जुड़े शास्त्र संस्मरणों को भी सुनाया। स्वामी शिवानंद जी महाराज ने कहा कि किसी भी नदी तट के 10 किलोमीटर के क्षेत्र को पूरी तरीके से ऑर्गेनिक खेती से ही उत्पन्न की जानी चाहिए। उन्होंने अथर्ववेद के १२वें खंड के शास्त्र वर्णित श्लोकों का अर्थ समझाते हुए कहा कि नदियों और हवा का बहाव हर समय अविरल होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि एक मछली भी अपने गंतव्य की ओर पुनः लौटती है। लेकिन आज के युग में जब की चारों ओर बांध, बांध दिए गए हैं, यह पूरी सृजनशीलता की कड़ी को बाधित कर चुकी है। इसके दुष्परिणाम अतिवृष्टि, बादल फटना और सुखा जैसी स्थितियां पैदा करने की ओर ले जा रही है। उन्होंने Idol Immersion प्रतिमाओं के विसर्जन को एक बड़ी कुरीति बताया और कहा कि नमामि गंगे की धारा ०5 में इस हेतु 5 साल की सजा और ₹3 लाख तक जुर्माना का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि जहां अस्ति विसर्जन से नदिया पुष्ट और बलशाली बनती हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिमा मूर्ति विसर्जन (Idol Immersion) से नदिया दूषित होती है।

अपने अध्यक्ष उद्बोधन में अवकाश प्राप्त मेजर जनरल दिग्विजय सिंह ने कहा कि विसर्जन जैसी प्रथाएं टेलीविजन के प्रभाव से अधिक प्रचलन में आए हैं। उन्होंने जुलूस की प्रक्रियाओं को सामान्य व्यक्ति को प्रभावित करने वाला भी बताया। उन्होंने उत्तराखंड में बिंदाल और रिस्पना नदियों का उदाहरण देते हुए सटीक आंकड़ों के साथ यह बताया कि कैसे गंदगी नदियों का हिस्सा बनती जा रही है। और अनगिनत मैला और मल नदियों में डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि नदियों के किनारे अतिक्रमण मुंह बाए खड़ा हो रहा है। उन्होंने धराली और थराली जैसी घटनाओं को ऐसा सूचक माना जिससे आने वाले समय में यदि सबक न लिया गया तो भयावह परिणाम सामने आएंगे। मेजर जनरल कुंवर दिग्विजय सिंह ने वर्तमान में की जा रही नगर विकास (Town Planning) को No Planning का दर्जा दिया। उन्होंने इसके लिए Zone Based Planning की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए ठोस योजना सदन पटल पर रखी। उन्होंने वकालत की और कहा कि नगरों का विकास पूरी तरीके से Zone Based Planning पर ही आधारित की जानी चाहिए जिसमें बाजार, खेल, परिवहन , पार्किंग, रिहायशी, पूजा स्थानों से लेकर धरना प्रदर्शन तक के लिए विशेष Zone बनाकर किया जाना चाहिए़। उन्होंने कहा कि वर्तमान नगर योजनाओं में यदि एक बार भी किसी भवन अथवा योजना को हरी झंडी दिखा दी जाती है तो उसके उपरांत आवश्यक अंकुश लगाना लगभग असंभव सा हो जाता है। परन्तु Zone Based Planning में आवश्यक नियमन आसानी से लागू किए जा सकते हैं। जनरल सिंह ने नगरों में कंक्रीट का ढांचा बढ़ने के पीछे यही कारण गिनाए।

विमर्श श्रृंखला में विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉक्टर विनोद जुगलाण ने कहा कि पर्यावरण की व्यवस्था को नई पीढ़ी को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा की नई पीढ़ी को यूं तो स्वयं सीखना चाहिए, परंतु समझदार एवं परिपक्व नागरिकों को नई पीढ़ी को पर्यावरण का ज्ञान अभिप्रसारित करना चाहिए। उन्होंने स्वयं के द्वारा स्मृति वनों में सफलतापूर्वक लगाए जा रहे पेड़ों का उदाहरण देते हुए इस पर आवश्यक कार्य करने के लिए बल दिया।

दूसरे विशिष्ट वक्ता के रूप में देवेंद्र कैंथोला ने स्वामी विवेकानंद के पदचिह्नों पर शिक्षा व्यवस्था चलाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विकास की धारणा ऐसी होनी चाहिए जिसमें 75% भविष्य को केंद्रित कर, एवं 15% भूतकाल से सबक लेकर आगे बढ़ते हुए करनी चाहिए  श्री देवेंद्र कैंथोला ने आमूल चूल (Transformative Change) लाने पर जोर दिया।

विमर्श श्रृंखला में विशिष्ट वक्ताओं में लावासना के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बलवंत सिंह नेगी ने कहा कि नीति निर्माण के विभागों को गंभीर विषयों राजधानी इत्यादि पर ठोस दर्शन विकसित करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मंडल आयुक्त की नियुक्ति के पीछे एक समावेशी विकास दर्शन की सोच खड़ी की गई थी, जो वर्तमान में भारी नौकरशाही के चलते आवश्यक परिणाम देने में असफल सिद्ध हो रही है।

विशिष्ट वक्ताओं में समाजसेविका डॉ राधिका नागरथ ने कहा कि वृक्षाबंधन अभियान की विमर्श श्रृंखलाओं का क्रम एक शानदार पहल है। उन्होंने कहा कि हमें भोगवादी प्रवृत्ति को कैसे रोका जाए, इस पर गहनता से मंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग पर्यावरण से सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है, क्योंकि स्वास्थ्य से लेकर उसके रोजगार पर भी बुरा असर पड़ रहा है। राधिका नागरथ ने कहा कि पॉलिथीन डीकंपोज नहीं हो रहा फिर भी उसके प्रयोग पर अभी तक रोक नहीं लग पाई है।

वृक्षाबंधन अभियान के संस्थापक अध्यक्ष सैनिक शिरोमणि मनोज ध्यानी ने समूचे विमर्श को संयोजित किया एवं अपने उद्बोधन में बताया की आगामी ३१ जनवरी की श्रृंखला में एक विस्तृत मसौदा तैयार कर भारत सरकार एवं राज्य सरकार को सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। वृक्षाबंधन अभियान के सचिव अरुणादित्य ने बताया कि विमर्श श्रृंखलाओं के क्रम को आगे बढ़ते हुए एक विस्तार स्वरूप दिए जाने पर चर्चा बनाई जा रही है। वृक्षाबंधन अभियान की वर्तमान विमर्श श्रृंखला भाग VIII में धन्यवाद ज्ञापन अर्चना नेगी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

 

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