August 6, 2026

पवित्र परमार्थ गंगा आरती के साथ हुआ अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

ऋषिकेश, 15 मार्च। विश्व भर से आए योग साधक अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के अंतिम दिवस पर माँ गंगा के पावन तट पर एकत्रित हुए। दिन की शुरुआत शक्तिशाली सामूहिक योग साधना से हुई और समापन पवित्र परमार्थ गंगा आरती तथा संगीत, नृत्य और आनंदमय उत्सव के साथ हुआ। सात दिनों की यह दिव्य यात्रा केवल एक योग उत्सव नहीं, बल्कि मानवता के जागरण की वैश्विक साधना बन गई। यहाँ भारत की आत्मा, उसकी संस्कृति, योग और अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप विश्व के सामने प्रकट हुआ। परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव में विश्व शान्ति के लिये विशेष प्रार्थनाएँ और विश्व शान्ति यज्ञ सम्पन्न हुआ। पूज्य  स्वामीजी ने कहा, “भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि एक चेतना है-‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की चेतना। योग मन, आत्मा और सम्पूर्ण मानवता को जोड़ने का सेतु है।” पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि प्रेम हमारे शरीर, मन और संबंधों के अनुभव को बदल देता है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही समझ लिया था कि प्रेम मनुष्य के स्वास्थ्य, संतुलन और आंतरिक शांति के लिये अत्यंत आवश्यक है। ब्राजील से आये संत प्रेम बाबा ने कहा कि योग केवल तकनीक नहीं, बल्कि प्रेम और धर्म का आह्वान है। सनातन परंपरा में योग उस अनन्त ज्ञान रूपी पुष्प की एक पंखुड़ी है, जो हमें हमारे वास्तविक स्वरूप की ओर लौटने का मार्ग दिखाती है। अंतिम दिवस का प्रमुख आध्यात्मिक सत्र “द योग ऑफ लव: ओपनिंग द हार्ट ऐज़ अ पाथ ऑफ अवेकनिंग” विषय पर आयोजित हुआ, जिसमें प्रेम, करुणा और भक्ति को योग और आध्यात्मिक जीवन का वास्तविक सार बताया गया। सूर्योदय मंत्रोच्चार, योग सत्र, ध्यान, कीर्तन, आध्यात्मिक संवाद और विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से साधकों ने शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का अनुभव किया। सप्ताह भर की इस आध्यात्मिक यात्रा का समापन माँ गंगा के पावन तट पर भव्य गंगा आरती और आनंदमय उत्सव के साथ हुआ। अर्जेंटीना की योगिनी सैंड्रा बार्न्स और उनके साथियों के साथ काकाओ सेरेमनी, एलिमेंटल डांस और सेक्रेड साउंड्स ने इस दिव्य महोत्सव को एक प्रेरणादायी और अविस्मरणीय समापन प्रदान किया।

 

 

 

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