24 मार्च को आयोजित होने वाली ‘जन आक्रोश रैली’ के लिए तैयारी पूरी
एसकेएम न्यूज सर्विस
देहरादून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘जन आक्रोश रैली’ के लिए उत्तराखंड राज्य में व्यापक तैयारी पूरी कर ली है। दिल्ली रैली में देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर, नैनीताल सहित पहाड़ी जिलों में सैकड़ों की संख्या में पार्टी व पार्टी के समर्थक हिस्सेदारी करेंगे जो बसों, रेलवे, नीजि वाहनों से दिल्ली कूच करेंगे। पार्टी उत्तराखंड ने रामलीला मैदान में होने वाली रैली की तैयारी हेतु जगह बैठकें, पर्चा वितरण तथा पोस्ट रिंग से अपने अभियान की शुरुआत की तथा 18 से 15 मार्च तक राज्यव्यापी जत्था जो 8 मार्च 026 देहरादून से शुरू होकर डोईवाला तथा हरिद्वार पहुंचा, 9 मार्च को हरिद्वार से उधमसिंह नगर 10 मार्च को अल्मोड़ा, सोमेश्वर,11 मार्च थराली, कर्णप्रयाग 12 मार्च को रूद्रप्रयाग, श्रीनगर 12 मार्च पौड़ी, 13 मार्च टिहरी ,14 मार्च टिहरी से देहरादून तथा 15 मार्च 026 सभावाला में विशाल जनसभा के साथ समाप्त हुआ। इस राज्यव्यापी जत्थे के समानन्तर स्थानीय स्तर पर राज्य में दर्जनों जत्थे निकले। इन जत्थे में राज्य के ज्वलंत मुद्दे उठाये गये तथा जल, जंगल, जमीन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, कानून व्यवस्था तथा महिलाओं पर बढ़ते अपराध के मामले प्रमुख थे। पार्टी के अनुसार, उत्तराखंड से कार्यकर्ता और समर्थक 24 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित रैली में भाग लेंगे। रैली में वरिष्ठ नेतागण संबोधन देंगे और पार्टी की भविष्य की रणनीति पर प्रकाश डाला जाएगा। यह रैली शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के शहीदी दिवस के एक दिन बाद आयोजित की जा रही है।
उत्तराखंड के जन अभियान में पोलिट ब्यूरो मेम्बर कामरेड बीजू कृष्णनन, कामरेड राजेन्द्र सिंह नेगी, पार्टी राज्य सचिव कामरेड राजेन्द्र पुरोहित ,किसान सभा के अखिल भारतीय संयुक्त सचिव कामरेड पुष्पेन्द्र त्यागी तथा सचिव अनन्त आकाश ने किया।
पोलित ब्यूरो के अनुसार यह रैली निम्नलिखित मांगों को लेकर आयोजित की जा रही है :-
श्रम संहिता: नई अधिसूचित श्रम संहिताओं को वापस लेना
मनरेगा: MGNREGA को कमजोर करने की बजाय मजबूत करना
बिजली क्षेत्र: बिजली संशोधन विधेयक को रोकना और निजीकरण का विरोध
कृषि: बीज विधेयक को वापस लेना
व्यापार समझौता: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध
ईरान पर अमेरिकी साम्राज्यवाद हमले का विरोध
