May 28, 2026

नई दिल्ली।  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 2024 बैच में महिला अधिकारियों के लगभग 41 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की सिविल सेवाओं का बदलता स्वरूप पूरे देश में हो रहे परिवर्तन को दर्शाता है, क्योंकि आईएएस के इतिहास में अब तक की सबसे अधिक महिला-पुरुष भागीदारी में से एक है। यह दर्शाता है कि अवसरों तक पहुंच पारंपरिक सामाजिक और क्षेत्रीय सीमाओं से परे विस्तारित हो रही है और युवा भारतीय आकांक्षा, प्रौद्योगिकी और जवाबदेही से प्रेरित एक नई शासन संस्कृति को आकार दे रहे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली के विनय मार्ग स्थित सिविल सर्विसेज ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट (सीएसओआई) में 2024 बैच के आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं से बातचीत करते हुए कहा कि आज सेवा में प्रवेश करने वाले अधिकारी इतिहास में एक अद्वितीय स्थान रखते हैं, क्योंकि जब भारत 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब वे अपने करियर के शिखर पर नेतृत्व की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इस क्षण को एक सौभाग्य और एक जिम्मेदारी दोनों बताते हुए कहा कि भारत के शासन की भावी दिशा काफी हद तक सिविल सेवकों की इस पीढ़ी द्वारा निर्धारित की जाएगी। यह संवाद सहायक सचिव पाठ्यक्रम का हिस्सा था, जिसके तहत 2024 बैच के 184 आईएएस अधिकारियों को केंद्र में नीति निर्माण, समन्वय तंत्र और प्रशासनिक कामकाज का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने के लिए 4 मई से 25 जून, 2026 तक आठ सप्ताह की अवधि के लिए भारत सरकार के 49 मंत्रालयों और विभागों से जोड़ा गया है।

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की संयुक्त सचिव (प्रशिक्षण) सुश्री छवि भारद्वाज; लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) की संयुक्त निदेशक सुश्री शनमुगा प्रिया मिश्रा और एलबीएसएनएए के उप निदेशक श्री क्रांति कुमार पति शामिल थे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए सहायक सचिव पाठ्यक्रम ने युवा आईएएस अधिकारियों को मिलने वाले प्रारंभिक प्रशासनिक अनुभव में मौलिक परिवर्तन ला दिया है। पिछले एक दशक में इस पहल के विकास को याद करते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने अधिकारियों की एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने में मदद की है जो सेवा की शुरुआत से ही अधिक आत्मविश्वासी, नीति-उन्मुख और संस्थागत रूप से जुड़ी हुई है।डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि महिला अधिकारियों का लगभग 41 प्रतिशत प्रतिनिधित्व भारत में हो रहे व्यापक सामाजिक परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा और पेशेवर क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति यह दर्शाती है कि अवसर और पहुंच का किस प्रकार तेजी से लोकतंत्रीकरण हो रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने सिविल सेवा चयन के बदलते क्षेत्रीय स्वरूप के बारे में भी बात करते हुए कहा कि जिन राज्यों का प्रतिनिधित्व पहले सीमित था, वे अब बड़ी संख्या में सफल उम्मीदवार दे रहे हैं, जबकि कई पारंपरिक रूप से प्रभावशाली क्षेत्रों में करियर संबंधी प्राथमिकताएं उभरते क्षेत्रों और वैश्विक अवसरों की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि ये बदलाव एक अधिक महत्वाकांक्षी और गतिमान भारत के उदय का संकेत देते हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान बैच के 78 अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं, साथ ही चिकित्सा, कानून, प्रबंधन और मानविकी के पेशेवर भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में, विशेष रूप से ऐसे समय में जब सरकारी कार्यक्रम अधिक डेटा-आधारित, डिजिटल और नवाचार-उन्मुख होते जा रहे हैं, शासन के लिए तकनीकी समझ और अंतर्विषयक सोच की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। प्रशिक्षार्थियों से अनौपचारिक बातचीत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आधुनिक शासन व्यवस्था अब कठोर पदानुक्रम और एकतरफा संवाद के माध्यम से नहीं चलती। उन्होंने अधिकारियों को अपने पूरे करियर में खुले विचारों वाले शिक्षार्थी बने रहने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि स्‍थायी ज्ञान की तुलना में अनुकूलन, पुरानी बातों को भूलने और विकसित होने की क्षमता अब कहीं अधिक मूल्यवान है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रशासन का स्वरूप काफी बदल गया है, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों की भागीदारी पर अधिक जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के “अधिकतम शासन, न्यूनतम सरकार” के शासन दर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग न केवल कार्यकुशलता के लिए बल्कि नागरिकों और संस्थानों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए भी किया जाना चाहिए। डॉ. जितेंद्र सिंह ने अधिकारियों से मिशन कर्मयोगी जैसे प्लेटफार्मों का पूरा उपयोग करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शासन, डेटा विश्लेषण और सार्वजनिक संवाद सहित उभरते क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भविष्य के प्रशासकों से तकनीकी दक्षता के साथ-साथ सहानुभूति, संवेदनशीलता और नैतिक सार्वजनिक आचरण की अपेक्षा की जाएगी। इस संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन, शासन संबंधी चुनौतियों, नेतृत्व की जिम्मेदारियों और सिविल सेवकों से जनता की बदलती अपेक्षाओं पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने युवा अधिकारियों को निष्पक्षता बनाए रखने, नागरिकों के लिए सुलभ रहने और दिखावे के बजाय सार्थक जनहितकारी परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत@2047 को महज एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन बताते हुए कहा कि इस पीढ़ी के अधिकारी आने वाले दशकों में भारत के उत्थान के प्रमुख वाहक बनेंगे। उन्होंने उनसे विनम्रता, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य की व्यापक भावना के साथ लोक सेवा करने का आग्रह किया।

 

 

 

 

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