रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर दिया बल
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री श्री रिचर्ड मार्ल्स ने नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा मंत्रियों के संवाद के दूसरे संस्करण की सह-अध्यक्षता की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का स्वागत किया और 9 अक्टूबर, 2025 को हुए पहले संस्करण के बाद से परामर्श एवं सहयोग में हुई वृद्धि पर विचार-विमर्श किया। मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए अपने प्रधानमंत्रियों के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया, जिसका उद्देश्य सामूहिक शक्ति को बढ़ाना, दोनों देशों की सुरक्षा में योगदान देना और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देना है। उन्होंने रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा को नवीनीकृत और सुदृढ़ करने के लिए अपने प्रधानमंत्रियों की प्रतिबद्धता को साकार करने की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग में हुई प्रगति और संयुक्त समुद्री सुरक्षा सहयोग रोडमैप को अंतिम रूप देने के प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने समुद्री गश्ती विमानों द्वारा सहयोगात्मक समुद्री क्षेत्र जागरूकता गतिविधियों को आगे बढ़ाने और पनडुब्बी क्षेत्र जागरूकता बढ़ाने के अवसरों का पता लगाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलिया के समुद्री सीमा कमान के बीच और अधिक सहयोग को प्रोत्साहित किया। मंत्रियों ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने में क्षेत्रीय भागीदारों के साथ सहयोग बढ़ाने के महत्व की पुष्टि की। उन्होंने नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया और क्षेत्र में निर्बाध व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुरूप समुद्र के अन्य वैध उपयोगों के लिए अपना दृढ़ समर्थन व्यक्त किया। हिंद महासागर रिम एसोसिएशन के समुद्री सुरक्षा एवं संरक्षा कार्य समूह के सह-प्रमुख के रूप में भारत और ऑस्ट्रेलिया, हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एवं संरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए जून 2026 में चेन्नई स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र में संयुक्त रूप से खोज एवं बचाव अभ्यास और एक व्यापक अभ्यास की मेजबानी करने के लिए तत्पर हैं। दोनों पक्षों ने 2020 के पारस्परिक रसद सहायता समझौते के आधार पर अभ्यासों और अभियानों के लिए प्रक्रियात्मक अंतर-संचालनीयता बढ़ाने की व्यवस्थाओं का पता लगाने का संकल्प लिया। उन्होंने परिचालन संबंधी परिचितता बढ़ाने के लिए एक-दूसरे के क्षेत्रों से विमानों की तैनाती जारी रखने पर भी सहमति व्यक्त की। मंत्रियों ने घोषणा की कि रक्षा औद्योगिक सहयोग को गहरा करने के अगले कदम के रूप में भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा सामग्री एवं रक्षा सेवाओं के प्रावधान के संबंध में एक समझौता ज्ञापन विकसित करना शुरू करेंगे। उन्होंने रक्षा औद्योगिक सहयोग और जुड़ाव के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया और द्विपक्षीय रक्षा उद्योग संबंधों में वृद्धि के प्रतीक के रूप में अक्टूबर 2025 में ऑस्ट्रेलिया के पहले रक्षा व्यापार मिशन और ऑस्ट्रेलिया-भारत रक्षा उद्योग गोलमेज सम्मेलन का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग, अनुसंधान और सामग्री पर संयुक्त कार्य समूह के माध्यम से भी आदान-प्रदान के और अधिक अवसरों की संभावना तलाशने पर सहमति व्यक्त की। दोनों मंत्रियों ने सेंसर प्रौद्योगिकी जैसे नए प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भविष्य में रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान सहयोग की संभावनाओं को तलाशने की इच्छा व्यक्त की। ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री ने भारत को 2026 के ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। मंत्रियों ने अपने रक्षा बलों के बीच बढ़ते सहयोग की सराहना की और अभ्यास टैलिस्मान सेबर 2027 में भारत की बढ़ी हुई भागीदारी की आशा व्यक्त की। उन्होंने फरवरी 2026 में भारत के अभ्यास मिलान में ऑस्ट्रेलिया की भागीदारी और मार्च 2026 में ऑस्ट्रेलिया के अभ्यास काकाडू में भारत की भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने 2026 में एक-दूसरे के बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यासों में अपने देशों की भागीदारी की आशा व्यक्त की, जिसमें अभ्यास पिच ब्लैक में वायु-से-वायु ईंधन भरने पर द्विपक्षीय कार्यान्वयन समझौते को क्रियान्वित करना भी शामिल है। दोनों पक्षों ने नए क्षेत्रों में सैन्य सहयोग के विस्तार पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने इस वर्ष के आर्मी एक्सरसाइज ऑस्ट्राहिंद के विकास का स्वागत किया, जिसमें अब उभयचर युद्ध और तटीय युद्धाभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ऑस्ट्रेलिया ने ऑपरेशन रेंडर सेफ 2026 में भारत की पहली भागीदारी का स्वागत किया। भारत ने पनडुब्बी बचाव अभ्यास ब्लैक कैरिलॉन में भाग लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया के निमंत्रण का स्वागत किया।
मंत्रियों ने परिचालन मुख्यालयों के बीच सूचना साझाकरण में वृद्धि का स्वागत किया। उन्होंने इस वर्ष के अंत में होने वाली पहली संयुक्त स्टाफ वार्ता के लिए आशा व्यक्त की। उन्होंने रणनीतिक, परिचालन और सामरिक स्तरों पर सुरक्षित द्विपक्षीय संचार के महत्व को स्वीकार किया और विषय-वस्तु के आदान-प्रदान के माध्यम से इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का स्वागत किया। प्रशिक्षण सहयोग के संबंध में, दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को 2028-2029 में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा महाविद्यालय में एक भारतीय अतिथि प्रशिक्षक की तैनाती की व्यवस्था को अंतिम रूप देने के लिए प्रोत्साहित किया ताकि पेशेवर सैन्य जुड़ाव, ज्ञान आदान-प्रदान और रणनीतिक संरेखण को मजबूत किया जा सके। मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक अभिसरण का स्वागत किया। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साझेदारों के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ाने के लिए समुद्री क्षेत्र जागरूकता पर सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। मंत्रियों ने क्वाड इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन पहल के लिए अपना मजबूत समर्थन व्यक्त किया, जिसे प्रारंभ में हिंद महासागर क्षेत्र में लागू किया जाएगा, साथ ही विषय विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और टेबलटॉप अभ्यासों के माध्यम से भी इसे आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों पक्षों ने गुरुग्राम में सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र के माध्यम से क्वाड इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस के हिंद महासागर क्षेत्र कार्यक्रम के भारत द्वारा संचालन का स्वागत किया। उन्होंने मौजूदा इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस प्रयासों का लाभ उठाते हुए पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक साझा परिचालन परिदृश्य विकसित करने के लिए काम करने पर सहमति व्यक्त की।
