पीएम-एसईटीयू योजना पर उद्योग जगत के साथ संवाद स्थापित किया
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
नई दिल्ली। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में राजस्थान क्लस्टर के लिए पीएम-एसईटीयू (उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार क्षमता) पर एक उद्योग संवाद का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में पीएम-एसईटीयू योजना पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसके बाद उद्योग जगत के साथ विचार-विमर्श और परामर्श आयोजित किए गए ताकि राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक केंद्र में इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए व्यावहारिक उपाय निर्धारित किए जा सकें। यह क्लस्टर उत्तर भारत के सबसे तेजी से बढ़ते विनिर्माण क्षेत्रों में से एक है, जिसमें ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और उभरते हरित उद्योगों में मजबूत उपस्थिति है। इस संवाद में उद्योग के प्रमुख हितधारक, नीति निर्माता और कौशल विकास तंत्र के नेताओं ने भागीदारी की, जिसका उद्देश्य कौशल विकास पहलों में उद्योग की भागीदारी को मजबूत करना, प्रशिक्षण को कार्यबल की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है।
इस संगोष्ठी की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने की। श्री यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कौशल विकास को सतत औद्योगिक विकास के साथ एकीकृत करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उभरते महत्वपूर्ण अवसरों का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में कौशल विकास रोजगार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने भी इस संगोष्ठी की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने दोहराया कि पीएम-एसईटीयू का उद्देश्य उद्योगों के लिए भर्ती और प्रशिक्षण लागत को कम करना और साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में सुधार करना है। श्री चौधरी ने कहा कि यह दृष्टिकोण सीएसआर लाभार्थियों को सीधे लाभ पहुंचाएगा और समावेशी विकास को बढ़ावा देगा। उन्होंने यह भी बताया कि सेक्टर स्किल काउंसिल एंकर इंडस्ट्री पार्टनर (एआईपी) के रूप में कार्य कर सकती हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रशिक्षण ढांचे को मजबूत करने के लिए उद्योग विश्वविद्यालयों के साथ ज्ञान भागीदार के रूप में सहयोग कर सकते हैं। श्री चौधरी ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित शिक्षा केंद्रों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें खेल सुविधाएं भी शामिल हों, ताकि वे युवाओं के लिए समग्र ‘फिनिशिंग स्कूल’ के रूप में कार्य कर सकें, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत प्लेसमेंट परिणाम दोनों सुनिश्चित हो सकें।
