घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के अवैध परिवहन एवं वितरण के मामले में अभियुक्त दोषसिद्ध
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के अवैध परिवहन एवं वितरण के मामले में माननीय न्यायालय द्वारा अभियुक्त को दोषसिद्ध कर दंडित किया गया है। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुण्ड मोटर मार्ग (गुप्तकाशी-उखीमठ) पर पूर्ति विभाग एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा जांच के दौरान एक वाणिज्यिक वाहन को रोका गया। वाहन में कुल 60 एलपीजी सिलेंडर (इण्डेन, भारत गैस एवं एचपी गैस कम्पनी) लदे हुए थे, जिनमें घरेलू एवं वाणिज्यिक दोनों प्रकार के सिलेंडर शामिल थे। वाहन चालक एवं अभियुक्त रन सिंह से सिलेंडरों के परिवहन एवं विक्रय के संबंध में वैध अनुज्ञप्ति/परमिट एवं अन्य आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया, किन्तु वह मौके पर कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। प्रथम दृष्टया मामला घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के अवैध परिवहन एवं वितरण का पाए जाने पर संयुक्त टीम द्वारा वाहन एवं सभी सिलेंडरों को कब्जे में लेते हुए अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया गया। मामले का विचारण माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रुद्रप्रयाग श्री अशोक कुमार की अदालत में संपन्न हुआ। दिनांक 29 जून, 2026 को न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं अभिलेखों के आधार पर अभियुक्त रन सिंह को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत दोषसिद्ध पाया। न्यायालय ने अपराधी परीवीक्षा अधिनियम, 1958 की धारा 4 के विधिक प्रावधानों के अंतर्गत अभियुक्त रन सिंह को एक वर्ष की अवधि के लिए सदाचरण की परीवीक्षा पर दंडित किया। उक्त प्रकरण में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी एवं सशक्त पैरवी सहायक अभियोजन अधिकारी श्री प्रमोद चन्द्र आर्य द्वारा की गई, जिसके परिणामस्वरूप अभियोजन पक्ष न्यायालय में आरोप सिद्ध कराने में सफल रहा।
