August 10, 2026

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून।  8 अगस्त 1942 को मुंबई के गवालिया टैंक मैदान (ऑगस्ट क्रांति मैदान) में महात्मा गांधी के नेतृत्व में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति ने ‘भारत छोड़ो’ प्रस्ताव पारित किया। यहीं गांधीजी ने “करो या मरो” का नारा देकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने का अंतिम और निर्णायक आदेश दिया था।

भारत छोड़ो आन्दोलन, द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 8 अगस्त 1942 को आरम्भ किया गया था। यह एक आन्दोलन था जिसका लक्ष्य भारत से ब्रिटिश साम्राज्य को समाप्त करना था। यह आंदोलन महात्मा गांधी द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के मुम्बई अधिवेशन में शुरू किया गया था। यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विश्वविख्यात काकोरी काण्ड के ठीक सत्रह साल बाद 8 अगस्त सन 1942 को गांधीजी के आह्वान पर समूचे देश में एक साथ आरम्भ हुआ। यह भारत को तुरन्त आजाद करने के लिये अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एक सविनय अवज्ञा आन्दोलन था। क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ़ अपना तीसरा बड़ा आंदोलन छेड़ने का फ़ैसला लिया। 8 अगस्त 1942 की शाम को मुंब‌‌ई में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के बम्बई सत्र में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नाम दिया गया था। हालांकि गाँधी जी को फ़ौरन गिरफ़्तार कर लिया गया था लेकिन देश भर के युवा कार्यकर्ता हड़तालों और तोड़फ़ोड़ की कार्यवाहियों के जरिए आंदोलन चलाते रहे। कांग्रेस में जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी सदस्य भूमिगत प्रतिरोधि गतिविधियों में सबसे ज्यादा सक्रिय थे। पश्चिम में सतारा और पूर्व में मेदिनीपुर जैसे कई जिलों में स्वतंत्र सरकार, प्रतिसरकार की स्थापना कर दी गई थी। अंग्रेजों ने आंदोलन के प्रति काफ़ी सख्त रवैया अपनाया फ़िर भी इस विद्रोह को दबाने में सरकार को साल भर से ज्यादा समय लग गया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने गांधी जी द्वारा भारत से “एक व्यवस्थित ब्रिटिश वापसी” कहे जाने वाले आह्वान को लेकर एक व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू किया। युद्ध में होने के बावजूद, ब्रिटेन कार्रवाई के लिए तैयार था। गांधी जी के भाषण के कुछ ही घंटों के भीतर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लगभग पूरे नेतृत्व को बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया गया। अधिकांश ने युद्ध का शेष समय जेल में बिताया और जनता से उनका कोई संपर्क नहीं रहा। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध देश भर में कई हिंसक घटनाएं हुईं और औपनिवेशिक सरकार ने हजारों नेताओं को गिरफ्तार कर 1945 तक जेल में रखा। अंततः, अंग्रेजों को यह एहसास हुआ कि भारत पर दीर्घकाल तक शासन करना असंभव है, और युद्धोत्तर युग का मुद्दा यह बन गया कि गरिमापूर्ण और शांतिपूर्ण तरीके से कैसे बाहर निकला जाए। यह आंदोलन 1945 में सभी जेल में बंद राष्ट्रवादियों की रिहाई के साथ समाप्त हुआ। आंदोलन के दौरान शहीद हुए प्रमुख स्वतंत्रता कार्यकर्ताओं में मुकुंद काकती, मातंगिनी हाजरा, कनकलता बरुआ, कुशल कोंवर, भोगेश्वरी फुकनानी और अन्य शामिल हैं। 1992 में, भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत छोड़ो आंदोलन की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में 1 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया।

भारत छोड़ो आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक बहुत महत्वपूर्ण आंदोलन था। इसका उद्देश्य भारत से ब्रिटिश शासन को समाप्त करना और भारत को स्वतंत्र कराना था।

  1. आंदोलन की शुरुआत

द्वितीय विश्व युद्ध के समय ब्रिटेन ने भारत को भारतीय नेताओं की सहमति के बिना युद्ध में शामिल कर दिया। इससे भारतीय नेताओं में असंतोष बढ़ गया।

1942 में ब्रिटिश सरकार ने क्रिप्स मिशन भारत भेजा। क्रिप्स मिशन भारत को तत्काल स्वतंत्रता देने के लिए तैयार नहीं था। उसके प्रस्तावों को कांग्रेस ने स्वीकार नहीं किया। इसकी असफलता के बाद गांधीजी ने अंग्रेजों के विरुद्ध एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।

  1. 8 अगस्त 1942 का ऐतिहासिक दिन

8 अगस्त 1942 को मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक हुई। इसमें भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित किया गया।

महात्मा गांधी ने देशवासियों को “करो या मरो” का संदेश दिया। उनका उद्देश्य था कि अंग्रेज भारत छोड़ें और भारत स्वतंत्र हो।

  1. नेताओं की गिरफ्तारी

आंदोलन शुरू होने के तुरंत बाद अंग्रेजी सरकार ने गांधीजी और कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।

नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन रुका नहीं। देश के अलग-अलग हिस्सों में विद्यार्थियों, युवाओं और आम लोगों ने आंदोलन को आगे बढ़ाया।

  1. जनता की भूमिका

लोगों ने हड़तालें, जुलूस और ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया। कई स्थानों पर सरकारी कार्यालयों और संचार व्यवस्था के खिलाफ विरोध हुआ।

जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेता भूमिगत रहकर आंदोलन को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहे।

कुछ क्षेत्रों में लोगों ने अपनी स्थानीय समानांतर सरकारें भी स्थापित कीं। उदाहरण के लिए सतारा में “प्रतिसरकार” और बंगाल के मेदिनीपुर क्षेत्र में समानांतर प्रशासन का प्रयास हुआ।

  1. अंग्रेजों की कार्रवाई

ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन को दबाने के लिए बहुत कठोर कदम उठाए। हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को जेल में डाल दिया गया।

इसके बावजूद भारत के लोगों में स्वतंत्रता की भावना और मजबूत होती गई।

  1. आंदोलन का महत्व

भारत छोड़ो आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय अब ब्रिटिश शासन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे।

यद्यपि आंदोलन को अंग्रेजों ने दबा दिया, लेकिन इसने स्वतंत्रता की मांग को और मजबूत कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन के लिए भारत पर लंबे समय तक शासन करना कठिन हो गया और अंततः 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ।

याद रखने योग्य मुख्य बातें

वर्ष: 1942

प्रमुख तिथि: 8 अगस्त 1942

स्थान: मुंबई

मुख्य नेता: महात्मा गांधी

मुख्य उद्देश्य: भारत से ब्रिटिश शासन समाप्त करना

प्रसिद्ध संदेश: “करो या मरो”

महत्व: स्वतंत्रता प्राप्ति के अंतिम चरण को मजबूत करने वाला प्रमुख आंदोलन।

 

 

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