बेंगलुरु में आयोजित किया जाएगा 16वां एयरो इंडिया सम्मेलन
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 02 सितम्बर। एशिया का सबसे बड़ा एयर शो और दुनिया की प्रमुख एयरोस्पेस और रक्षा प्रदर्शनियों में से एक, एयरो इंडिया, अपने 16वें संस्करण के साथ 8 से 12 फरवरी, 2027 तक कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित एयर फोर्स स्टेशन, येलाहांका में वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अग्रणी वैश्विक एयरोस्पेस और रक्षा कंपनियों, नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों, नवोन्मेषकों, उद्योग हितधारकों और रक्षा बलों के कर्मियों को एक साझा मंच पर लाएगा। एयरो इंडिया एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आयोजन के रूप में उभरा है जो एयरोस्पेस, रक्षा विनिर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियों और नवाचार में देश की बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। यह व्यापारिक जुड़ाव, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक संवाद के लिए एक गतिशील मंच प्रदान करता है, साथ ही भारत के विस्तारित रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र और वैश्विक एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में इसकी बढ़ती भूमिका को उजागर करता है। पांच दिवसीय इस आयोजन में एक व्यापक प्रदर्शनी और कई व्यावसायिक एवं रणनीतिक गतिविधियाँ शामिल होंगी, जो उद्योग जगत के आपसी संवाद, सरकार और उद्योग जगत के बीच समन्वय, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और सहयोग के अवसर प्रदान करेंगी। इसमें भारतीय वायु सेना और भाग लेने वाली अंतर्राष्ट्रीय वायु सेना टीमों द्वारा शानदार हवाई प्रदर्शन भी होंगे, जिससे दर्शकों को उन्नत विमानन क्षमताओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलेगा। एयरो इंडिया 2027 के लिए एक समर्पित वेब-आधारित पोर्टल विकसित किया गया है ताकि प्रदर्शकों और आगंतुकों के लिए सुगम भागीदारी सुनिश्चित की जा सके और व्यापक सेवाएं प्रदान की जा सकें। प्रदर्शनी स्थल के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और बुकिंग www.aeroindia.gov.in के माध्यम से की जा सकेगी , और प्रदर्शकों के पंजीकरण 3 सितंबर, 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। एयरो इंडिया 2027 से भारत के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण गति मिलने और वैश्विक रक्षा एवं एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में इसकी उभरती स्थिति को बल मिलने की उम्मीद है। यह आयोजन लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप सहित भारतीय रक्षा उद्योगों की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देगा, साथ ही साझेदारी, निवेश, निर्यात और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए नए अवसर भी प्रदान करेगा।
