प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हम 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ का संकल्प साकार करेंगे

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज गोवा की राजधानी पणजी में नारकोटिक्स नियंत्रण पर एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री श्री प्रमोद सावंत भी उपस्थित थे। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत सरकार ने देश की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए ढेर सारे कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने, तब देश के सामने तीन विकराल समस्याएं थीं, जिसमें जम्मू-कश्मीर में बढ़ता आतंकवाद, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर में अनेक हथियारबंद संगठनों द्वारा पैदा की जा रही अशांति शामिल थी। इसके अलावा, आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कई बम धमाकों से भी काफी परेशान था। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े आंदोलन हो रहे थे। ठीक उसी दौर में मोदी जी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। वर्ष 2019 से अब तक उनके नेतृत्व में पीछे मुड़कर देखें तो स्थिति काफी बदली है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद अलगाववाद की भावना में काफी कमी आई है। आतंकवाद के आंकड़े धीरे-धीरे सिकुड़ते हुए शून्य की ओर बढ़ते दिख रहे हैं और जम्मू-कश्मीर विकास के पथ पर आगे बढ़ चुका है। जम्मू-कश्मीर और देश के बाकी हिस्सों के बीच जो मानसिक दूरी थी, उसे पाटने के भी सफल प्रयास हुए हैं।पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज लगभग अतीत बन चुकी है। रेड कॉरिडोर की कल्पना करने वाले अधिकतर लोग आज हथियार डालकर सरेंडर कर चुके हैं और मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इसी तरह पूर्वोत्तर में भी लगभग 11,000 युवाओं ने हथियार डाले हैं। भारत सरकार ने उनसे 14 से अधिक समझौते किए हैं और आज पूर्वोत्तर भी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2019 के बाद अपराध करके भाग निकले भगोड़ों के खिलाफ भी अभियान चलाया गया है। 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण किया गया है। इनमें आर्थिक अपराध, आतंकवाद, नार्कोटिक्स और गैंगवार जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त लोग शामिल हैं। इन सभी को भारत की अदालतों के सामने लाया गया है।पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए। अकेले 2026 में जुलाई तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की गई। इसके लिए ‘भारतपोल’ के रूप में एक नई व्यवस्था बनाई गई है। 14 से अधिक केंद्रीय एजेंसियाँ और सभी राज्यों की पुलिस भारतपोल से जुड़ी हुई हैं। हर राज्य के भगोड़ों के प्रत्यर्पण के लिए भारतपोल के माध्यम से एक सुव्यवस्थित तंत्र तैयार किया गया है।वर्ष 2019 से 2026 तक भगोड़ों की लगभग 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति सील या जब्त की जा चुकी है। नए आपराधिक कानूनों और न्याय संहिताओं ने भगोड़ों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का मार्ग भी आसान बनाया है। गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि साइबर अपराधों के लिए भी एक व्यवस्थित तंत्र तैयार किया गया है, जिसकी निगरानी प्रधानमंत्री मोदी जी स्वयं कर रहे हैं। आज 1930 हेल्पलाइन साइबर अपराधों से बचाव का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।तीनों नए आपराधिक कानूनों को गृह मंत्रालय के माध्यम से राज्यों के सहयोग से पुलिस स्टेशन स्तर तक लागू करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि वह गोवा के मुख्यमंत्री और गोवा पुलिस को धन्यवाद करते हैं कि उन्होंने इतने कम समय में नई न्याय संहिता और तीन आपराधिक कानूनों को लागू कर राज्य में दोषसिद्धि दर को 53.2 प्रतिशत तक पहुँचा दिया है। इसका अर्थ है कि दर्ज होने वाली एफआईआर में सजा दिलाने की दर में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि नार्कोटिक्स एक ऐसा अपराध है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों को नष्ट कर सकता है। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स से अर्जित कमाई का उपयोग आतंकवाद के लिए भी होता है। नारको-टेरर का मॉड्यूल दुनिया के कई देशों में सक्रिय है और पूरी दुनिया आज इस समस्या से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि 2019 से हमने इस पर नकेल कसने की ठोस व्यवस्था की है। इसके लिए हमने व्यवस्थाएँ बदली हैं, नेटवर्क पकड़े हैं, वित्तीय श्रृंखला तोड़ी है और व्यसन के शिकार लोगों को नशे से मुक्त करने के लिए उनका हैंडहोल्डिंग भी किया है। श्री शाह ने कहा कि 2014 से पहले यह लड़ाई टुकड़ों-टुकड़ों में लड़ी जाती थी और छोटी जब्तियाँ कर एवं छोटे आरोपियों को पकड़कर संतोष कर लिया जाता था। लेकिन 2019 से मोदी सरकार ने इस विषय को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बनाया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई फाइलों और अलग-अलग एजेंसियों की कार्रवाई से निकलकर अब राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित और सतत अभियान बन गई है। गृह मंत्री ने कहा कि 2019 में चार-स्तरीय एनकॉर्ड तंत्र बनाया गया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में समर्पित एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स के गठन का मॉडल भेजा गया तथा संयुक्त समन्वय समिति गठित की गई। केंद्रीय एजेंसियों, राज्य सरकारों और उनके विभागों के समन्वय से बड़े नेटवर्क, अंतर-राज्यीय व अंतरराष्ट्रीय लिंक तथा परिचालन संबंधी खामियों को भरने की वैज्ञानिक पद्धति अपनाई गई।नशाग्रस्त युवाओं के पुनर्वास के लिए 1933 मानस हेल्पलाइन शुरू की गई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के कैडर का पुनर्गठन किया गया। NIDAAN पोर्टल के माध्यम से नारको अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया गया। CCTNS डेटा और इंटीग्रेटेड डेटा फ्यूजन से देशभर के हॉटस्पॉट, कार्यशैली और जब्ती का डेटा-आधारित मानचित्र तैयार किया गया। Bottom-to-Top और Top-to-Bottom दोनोंतरह के अप्रोच से जाँच की नई अवधारणा अपनाई गई। उन्होंने कहा कि अब ड्रग्स की छोटी-सी पुड़िया भी पकड़ी जाती है तो यह देखा जाता है कि वह देश में कहाँ से आई। इसी तरह, अगर सीमा पर बड़ा जखीरा पकड़ा जाता है तो यह पता लगाया जाता है कि वह पुड़िया बनकर युवाओं तक कैसे पहुँचने वाला था। इस तरह पूरे नेटवर्क की रिवर्स जाँच शुरू की गई। श्री अमित शाह ने कहा कि वित्तीय जाँच और PIT-NDPS पर विशेष जोर दिया गया तथा उच्च स्तरीय समर्पित टास्क फोर्स बनाई गई।डार्क नेट, एन्क्रिप्टेड संचार, क्रिप्टो लेन-देन और डेड ड्रॉप डिलीवरी के विरुद्ध प्रौद्योगिकी आधारित जाँच शुरू की गई। ANTF में समर्पित डार्क नेट-क्रिप्टो सेल बनाने का काम शुरू हुआ। प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स के लिए अंतर-मंत्रालयी व्यवस्था भी बनाई गई। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। श्री शाह ने कहा कि 2004 से 2014 तक विपक्षी पार्टी के शासन में 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त हुए थे, जिनका मूल्य लगभग 40 हजार करोड़ रुपये था। वहीं, 2014 से 2026 तक मोदी जी के नेतृत्व में यह जब्ती बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गई है, जिसका मूल्य लगभग 1 लाख 89 हजार करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 तक 3 लाख 36 हजार किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए थे, जबकि 2014-26 में 48 लाख 68 हजार किलोग्राम ड्रग्स नष्ट किए गए हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि एनकॉर्ड की 10 शीर्ष बैठकें, 7 कार्यपालक बैठकें, 277 राज्य स्तरीय बैठकें और 16,798 जिला स्तरीय बैठकें हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए 46 देशों के साथ समझौते किए गए हैं। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत 25 करोड़ नागरिकों से संपर्क कर शपथ दिलाई गई है। उपचार और पुनर्वास के तहत 5 लाख 70 हजार नागरिकों को नशामुक्त बनाने का काम हुआ है। गोवा में भी इसी अवधि में कार्रवाई लगभग तीन गुना बढ़ी है। श्री अमित शाह ने कहा कि जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है। इसमें सभी लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्णय किया गया है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को हम देश की सबसे बड़ी राष्ट्रीय लड़ाइयों में से एक के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का लक्ष्य है कि 2047 में नशामुक्त युवा शक्ति विकसित भारत का आधार बने। इस मिशन को सफल बनाने के लिए गृह मंत्रालय और सभी राज्य सरकारें एक साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 2026 से 2029 तक मिशन मोड घोषित किया गया है। समय-सीमाएँ तय की गई हैं, अलग-अलग मंत्रालयों को उत्तरदायी बनाया गया है, मापने योग्य परिणाम तय किए गए हैं तथा तिमाही समीक्षा और परिणाम आधारित जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप चार स्तंभों पर आधारित है। पहला—इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन आधारित एन्फोर्समेंट, दूसरा—प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, तीसरा – डिमांड एवं हार्म रिडक्शन और चौथा – क्षमता निर्माण एवं समन्वय। उन्होंने कहा कि यह सभी स्तंभ मिलकर ड्रग्स किंगपिन के डोजियर तैयार करेंगे, बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंकेज पर समन्वय करेंगे और हर व्यावसायिक मात्रा वाले मामले की वित्तीय जाँच कर नकेल कसेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ, सीआईएसएफ, भारतीय तटरक्षक दल, सीमा शुल्क और डीआरआई भूमि सीमा, बंदरगाह, एयरपोर्ट और कार्गो पर जोखिम-आधारित प्रोफाइलिंग तथा स्कैनर लगाकर अधिक पैनी निगरानी करेंगे। गृह मंत्री ने कहा कि सीबीआई, विदेश मंत्रालय और इंटरपोल भगोड़ों को वापस लाएंगे। प्रवर्तन निदेशालय, वित्तीय आसूचना इकाई और बैंकिंग तंत्र धन श्रृंखला पकड़ेंगे। श्री अमित शाह ने कहा कि एनसीसी, एनएसएस और My Bharat के माध्यम से लाखों ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा, युवा एवं खेल मंत्रालय तथा शिक्षण संस्थान शिक्षा संस्थानों को ड्रग-फ्री बनाने का संकल्प ले रहे हैं। सामाजिक न्याय, स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन मिलकर नशामुक्ति केंद्रों की संख्या तीन गुना बढ़ाकर 1,751 करने जा रहे हैं। लगभग 10,000 स्वयंसेवक इस अभियान में सेवा देंगे। क्षमता निर्माण के लिए मार्च 2027 तक प्रत्येक राज्य में पूर्ण सुसज्जित एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स बनाने के लिए 7 प्रतिशत केंद्रीय सहायता दी जाएगी। फॉरेंसिक रिपोर्ट 30 दिन में आने की व्यवस्था गृह मंत्रालय करेगा। इन चार स्तंभों में 25 घटक और 200 से अधिक एक्शन पॉइंट्स समयबद्ध तरीके से तय किए गए हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि भारत में विदेशियो का स्वागत है, लेकिन ड्रग्स के साथ नहीं। उन्होंने कहा किचतुष्कोणीय रणनीति (Quadrangular Approach) अपना कर Death Triangle और Death Crescent के रास्ते देश में ड्रग्स की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि देश से जिस तरह नक्सलवाद खत्म हुआ है, वैसे ही संकल्प के साथ ड्रग्स की समस्या भी खत्म की जाएगी।

 

 

 

 

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