स्वतंत्रता आंदोलन : प्रमुख शहीद और क्रांतिकारी

प्रमुख शहीद और क्रांतिकारी
शहीद भगत सिंह: इन्हें 23 मार्च 1931 को लाहौर षड्यंत्र केस में अंग्रेजों द्वारा फांसी दी गई थी।
सुखदेव थापर: भगत सिंह के साथ ही 23 मार्च 1931 को इन्हें भी फांसी दी गई।
शिवराम राजगुरु: इन्हें भी भगत सिंह और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फांसी पर लटकाया गया।
चंद्रशेखर आजाद: 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस के साथ मुठभेड़ के दौरान इन्होंने खुद को गोली ली और अंग्रेजों के हाथ नहीं आए।
मंगल पांडे: 1857 की क्रांति के महानायक, जिन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दी गई थी।
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’: काकोरी कांड के नायक, जिन्हें 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में फांसी दी गई।
अशफाक उल्ला खान: राम प्रसाद बिस्मिल के साथ काकोरी षड्यंत्र में शामिल इन्हें भी 19 दिसंबर 1927 को फांसी दी गई।
उधम सिंह: जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला लेने के लिए जनरल डायर को लंदन में मारने वाले, जिन्हें 31 जुलाई 1940 को फांसी दी गई।
बाघा जतिन (जतिन्द्र नाथ मुखर्जी): बंगाल के महान क्रांतिकारी, जो सितंबर 1915 में बालेश्वर में अंग्रेजों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए।
खुदीराम बोस: सबसे कम उम्र में फांसी पाने वाले क्रांतिकारियों में शामिल, जिन्हें 11 अगस्त 1908 को फांसी दी गई।
भारत के सबसे कम उम्र के शहीद बाजी राउत थे, जो मात्र 12 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद हुए थे। वहीं, खुदीराम बोस सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी थे जिन्हें अंग्रेजों ने फांसी दी थी।
बाजी राउत (सबसे कम उम्र के शहीद)
आयु: 12 वर्ष
घटना: 11 अक्टूबर 1938 को ओडिशा के ढेंकानाल ज़िले में।
बलिदान: वे ब्राह्मणी नदी के किनारे नाविक थे। उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों को अपनी नाव से नदी पार कराने से मना कर दिया था। अंग्रेजों ने गुस्से में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी।
खुदीराम बोस (सबसे कम उम्र के फांसी पाने वाले क्रांतिकारी)
आयु: 18 वर्ष
तारीख: 11 अगस्त 1908
बलिदान: उन्हें मुजफ्फरपुर बम कांड के बाद अंग्रेज़ी हुकूमत ने बिहार की मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दी थी

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