आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी फतेह सिंह बुटोला का जीवन परिचय
सुरेन्द्र बुटोला, जनपद चमोली
देहरादून। फतेह सिंह बुटोला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी 1917–1998
योद्धा आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी फतेह सिंह बुटोला जी का जन्म 10 अक्टूबर 1917 को अविभाजित उत्तर-प्रदेश के उत्तराखंड में जनपद चमोली के बघाण पट्टी के सिमली गाँव में हुआ। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी के आह्वान पर 18 रॉयल ब्रिटिश आर्मी को छोड़कर 15.02.1942 को सिंगापुर में आजादी के निर्णायक संग्राम में कूद पड़े। सन 1946 तक इनके विषय में इनके परिवार वालों को कुछ भी पता नहीं चल रहा था कि अब वो कहाँ हैं और किसके लिए सेवाएं दे रहे हैं? आज भी ब्रिटिश हुकूमत के वह पत्र लालकिले पर बने संग्रहालय में और उनके परिवारजनों के पास मौजूद हैं, जिसमें ब्रिटिश हुकूमत द्वारा ये कहा गया कि वो नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की आजाद हिन्द फौज को छोड़कर ब्रिटिश रॉयल आर्मी में शामिल हो जाएं, लेकिन आजादी के मतवालों की दीवानगी तो सिर्फ मातृभूमि की स्वतंत्रता थी। जब महान स्वतंत्रता सेनानी फतेह सिंह बुटोला सिंगापुर में आजाद हिन्द फौज में शामिल हुए तो उनके कानों में 1.50 तोला कान के कुंडल थे। नेताजी के कहने पर उन्होंने ये कुंडल आजाद हिन्द फौज को दान स्वरूप भेंट कर दिए। 05 नवम्बर 1945 को लालकिले पर आजाद हिन्द फौज के सेनानियों पर चल रहे मुकदमे के दौरान फतेह सिंह बुटोला जी को ब्रिटानी हुकूमत द्वारा नजरबन्द किया हुआ था। उनकी आजाद हिंद फौज की टोपी, खुखरी, और आजाद हिंद फौज और नेताजी से जुड़ी कई स्मृतियां लालकिले पर बने नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आईएनए के ऐतिहासिक संग्रहालय में संग्रहित है। 24 मई 1998 को महान स्वतंत्रता सेनानी का देहान्त हो गया।
