अंडमान और निकोबार कमांड में पहले बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास का समापन

नई दिल्ली, 07 नवंबर। अंडमान और निकोबार कमांड के तत्वावधान में, आयोजित विभिन्न गतिविधियों और समन्वित समुद्री अभियानों के बाद, श्री विजय पुरम में पहले बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सफलतापूर्वक समापन हुआ। अंडमान और निकोबार कमांड भारत की एकमात्र ‘ऑपरेशनल क्वाड सर्विस कमांड’ है, जिसका नेतृत्व कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी कर रहे हैं। इस अभ्यास में बिम्सटेक सदस्य देशों के नौसैनिक जहाजों ने हिस्सा लिया। इनमें भारतीय नौसेना के जहाज – INS तारागिरी, INS कर्मुक और INS सरयू; म्यांमार नौसेना का जहाज – UMS किंग आंग ज़ेया; और श्रीलंका नौसेना का जहाज – SLNS गजबाहु शामिल थे। यह आयोजन क्षेत्रीय समुद्री सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस अभ्यास में कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति और प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें बिम्सटेक के महासचिव इंद्र मणि पांडे; राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त); म्यांमार नौसेना की सेंट्रल नेवल कमांड के कमांडर रियर एडमिरल क्याव क्याव हटू; श्रीलंका के बंदरगाह और नागरिक उड्डयन मंत्रालय में निदेशक (निगरानी और मूल्यांकन) एयर वाइस मार्शल एमडीआर प्रसाद (सेवानिवृत्त); और बांग्लादेश के जहाज BNS प्रोटॉय के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद मंजूरुल इस्लाम शामिल थे। उनकी भागीदारी यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय समुद्री सहयोग और सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करने को कितनी अहमियत दी जा रही है। ‘दिल्ली घोषणापत्र’ की भावना के अनुरूप और नवंबर 2025 में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर आयोजित चौथी बिम्सटेक विशेषज्ञ समूह बैठक के परिणामों को आगे बढ़ाते हुए, इस अभ्यास ने भाग लेने वाली नौसेनाओं को एक बेहतरीन मंच प्रदान किया। इसके जरिए वे आपसी तालमेल (interoperability) को बेहतर बना सकीं, पेशेवर बातचीत को मजबूत कर सकीं और संयुक्त समुद्री गतिविधियों के माध्यम से आपसी समझ को बढ़ावा दे सकीं। श्री विजय पुरम में आयोजित ‘हार्बर चरण’ के दौरान उच्च-स्तरीय बैठकें, पेशेवर चर्चाएं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान हुए। इससे प्रतिभागी प्रतिनिधिमंडलों को अपने संस्थागत संबंधों को गहरा करने और दोस्ती के बंधन को मजबूत करने का अवसर मिला। इसके बाद, 02 से 03 नवंबर 2026 तक श्री विजय पुरम के पास समुद्री चरण आयोजित किया गया। इसमें समन्वित समुद्री तैनाती और संयुक्त परिचालन गतिविधियां शामिल थीं, जो एक सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण के प्रति बिम्सटेक सदस्य देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। परिचालन सहयोग के अलावा, इस अभ्यास ने इसमें शामिल कर्मियों के बीच आपसी भाईचारे को मजबूत किया और बंगाल की खाड़ी को समृद्ध, लचीला और खुला बनाए रखने के साझा दृष्टिकोण को पुख्ता किया। इसने बिम्सटेक देशों के उस सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित किया, जिसके तहत वे निरंतर सहयोग के माध्यम से साझा समुद्री चुनौतियों का सामना करने और अपने साझा समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस पहले अभ्यास का सफल समापन, बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच समुद्री जुड़ाव को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अंडमान और निकोबार कमांड के लिए, इस अहम आयोजन की मेजबानी करना क्षेत्रीय समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को फिर से स्थापित करता है। यह अभ्यास बिम्सटेक ढांचे के तहत भविष्य की संयुक्त पहलों के लिए एक मजबूत आधार भी तैयार करता है।

 

 

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