एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

पौड़ी। पौड़ी जनपद के श्रीनगर में स्थित सिद्धपीठ कमलेश्वर महादेव मंदिर में संतान प्राप्ति के लिए देश-विदेश से आए 190 दंपतियों ने किया खड़े दीये का अनुष्ठान। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से होती है निःसंतान दंपतियों की मनोकामना पूर्ण।

पौड़ी जनपद के श्रीनगर में स्थित सिद्धपीठ कमलेश्वर महादेव मंदिर एक प्राचीन और पवित्र शिव मंदिर है, जो संतान प्राप्ति की मनोकामनाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ कार्तिक चतुर्दशी की रात को “खड़े दीये” का अनुष्ठान होता है, जिसमें निसंतान दंपति हाथ में जलता दीया लेकर पूरी रात भगवान शिव की आराधना करते हैं। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है, और पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान राम ने भी यहाँ शिव की पूजा की थी। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम ने रावण वध के बाद यहाँ 108 कमल पुष्प अर्पित करके भगवान शिव की पूजा की थी। जब भगवान राम को रावण वध का पाप लगा, तो गुरु वशिष्ठ के कहने पर उन्होंने भगवान शिव की पूजा की। पूजा के दौरान जब भगवान शिव ने राम की भक्ति की परीक्षा के लिए कमल के फूल चुरा लिए, तो भगवान राम ने अपने एक नेत्र को कमल के स्थान पर अर्पित करने की कोशिश की। यह देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया। यह गढ़वाल क्षेत्र के पांच “महेश्वर पीठों” में से एक है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने भी शिव को प्रसन्न करने के लिए यहाँ तपस्या की थी। बैकुंठ चतुर्दशी की रात को महिलाएं कमर में नींबू और चावल की पोटली बांधकर और दंपति हाथ में जलता दीया लेकर रातभर पूजा करते हैं। मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के आसपास हुआ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंदिर की मूल संरचना का निर्माण आदि शंकराचार्य ने किया था। बाद में, उद्योगपति बिड़ला ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। यह माना जाता है कि चारधाम यात्रा से पहले या बाद में कमलेश्वर महादेव के दर्शन करने से यात्रा सफल होती है। केदारखंड के अनुसार, यह हिमालय के पाँच महेश्वर पीठों में से एक है। मंदिर में सरस्वती, गंगा और अन्नपूर्णा की धातु की मूर्तियां हैं। मुख्य मंदिर के पास गणेश और शंकराचार्य की मूर्तियां भी स्थापित हैं। शिववाहन नन्दी की एक विशाल पीतल की मूर्ति भी यहां है।

 

 

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