एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन दर्शनार्थ आए अमेरिका के पर्यटकों के दल ने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती से भेंट कर धार्मिक स्वतंत्रता सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर सारगर्भित संवाद किया। स्वामी ने कहा कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता कोई आधुनिक विचार नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का मूल स्वभाव है। “एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति”का वैदिक उद्घोष भारत की आत्मा है। यहाँ संवाद है, समन्वय है, सहअस्तित्व है। उन्होंने बताया कि भारत की धार्मिक स्वतंत्रता केवल संविधान में नहीं, बल्कि उपनिषद, गीता और संत परंपराओं में जीवित है। “ये यथा मां प्रपद्यन्ते”का संदेश स्पष्ट करता है कि ईश्वर किसी एक पद्धति में सीमित नहीं। स्वामी ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार के साथ-साथ कर्तव्य भी है-अपने विश्वास को जीना और दूसरों के विश्वास का सम्मान करना। यही भारत की सनातन चेतना है, यही वास्तविक धर्मनिरपेक्षता है। स्वामी के विचार सुनकर विदेशी पर्यटक भावविभोर हो उठे।

 

 

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