केंद्रीय बजट 2026-27 को पूरी तरह से जन-विरोधी माना
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून, 01 फरवरी। सीपीआईएम देहरादून के सचिव अनन्त आकाश व सीआईटीयू के जिला महामन्त्री लेखराज ने कहा की केंद्रीय बजट 2026-27 को सीपीआईएम एवं सैन्टर आफ इण्डियन टेड यूनियन्स (सीटू) इस बजट को “पूरी तरह से जन-विरोधी” और “संघीय-विरोधी” माना हैं। सीपीआईएम जिला कमेटी इस बजट की आलोचना करती है क्योंकि यह कॉरपोरेट क्षेत्र और अमीरों के लिए तैयार किया गया है। हमारा का कहना है कि इस बजट में “सतत विकास” का दावा केवल अमीरों की आय बढ़ाने तक सीमित है, जबकि आम मेहनतकश जनता के लिए संकट, बेरोजगारी और कम आय का सिलसिला जारी है। हम इस बजट में मनरेगा के लिए आवंटन को स्थिर रखने और न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए ठोस प्रतिबद्धता न होने की आलोचना करते है। इस बजट में स्पष्ट रूप से दिखता है कि भोजन सब्सिडी, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में वास्तविक व्यय में कमी की गई है। हमारा मानना है कि इस बजट से राज्यों के अधिकारों पर असर पड़ेगा और यह केंद्र-राज्य संबंधों को कमजोर करता है। इस बजट में पर्यटन को लेकर जो बात कही गई है उत्तराखंड में पर्यटन के नाम पर यह पहले ही कई परियोजनाएं ला चुके हैं जो स्पष्ट रूप से असफल रही है यह ऑल वेदर रोड लाते हैं जो ऑल वेदर में बंद ही नजर आती है। पर्यटन के लिए यह जब सड़के बनाते हैं तो यह यहां की संस्कृति को अनदेखा करते हुए बस भीड़ को पर्यटन का रूप और आंकड़ा बढ़ने का कार्य करते हैं इसका स्पष्ट उदाहरण जोशीमठ को बिना छुए बद्रीनाथ तक जाने वाली सड़क में देखा जा सकता है। पर्यटक आंकड़ों में वृद्धि के लिए राज्य सरकार यहां के गरीब लोगों के घरों को उजाड़ने का काम एलिवेटेड रोड के नाम पर कर रही है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जब हजारों की संख्या में पेड़ काटे जाते हैं तो उसके आंकड़े छिपाने का कार्य भी यह सरकार करती है इन्हें प्रकृति के लगातार हो रहे दोहन से कोई फर्क नहीं पड़ता है। मनरेगा को बदलकर यह लोग बीवी ग्राम जी योजना लेकर आते हैं और यह प्रचारित करते हैं 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा लेकिन यह नहीं बताते कि मनरेगा में जब 100 दिन का रोजगार पूरा नहीं हो पा रहा था तो अब 125 दिन के रोजगार यह किस तरीके से पूरा करेंगे। यह सरकार दिल्ली के एसी के कमरों में बैठकर उसे गांव की योजना बनाएंगे जहां या अभी तक बिजली पानी और नेटवर्क लाने में अक्षम रहे हैं।
