वाल्मीकि समाज से जनगणना के विवरण भरते समय अपनी उपजाति वाल्मीकि अवश्य बताएं : मकवाना

एसकेएम न्यूज़ सर्विस

देहरादून। आवास गणना के बाद देश में प्रारंभ होने जा रही जनगणना में अपनी संपूर्ण सही जानकारी के साथ अपनी जाति वाल्मीकि (अनुसूचित जाति) का उल्लेख करना ना भूले ताकि जनगणना के माध्यम से वाल्मीकि समाज की देश में कितनी आबादी है साथ ही वाल्मीकि समाज के आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का भी सरकार को सही आंकड़ा मालूम हो सके।  राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सफाई कर्मचारी आयोग उत्तराखंड सरकार के उपाध्यक्ष राज्य मंत्री भगवत प्रसाद मकवाना ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री और भारत सरकार ने गहन अध्ययन और विचार के उपरांत देश की सभी जातियां के आर्थिक पिछड़ेपन और सही स्थिति के आंकड़ों हेतु इस बार जनगणना जातीय आधार पर करने का महत्वपूर्ण निर्णय दिया है जिसके लिए प्रधानमंत्री जी और भारत सरकार का आभार प्रकट करते हैं। राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रांतिकारी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भागवत प्रसाद मकवाना ने तो यहां तक कहा है कि सफाई पैशे से जुड़ी अन्य उप जातियों को भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान वाल्मीकि समाज के रूप में प्रस्तुत करके जो लोग अनुसूचित जाति में अपनी आबादी सबसे ज्यादा दर्शाने का भ्रम फैलाते हैं। उनकी भी पोल खुल सकती है। क्योंकि सफाई कार्य से जुड़ी जातियों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से पुकारा जाता है जबकि उनका व्यवसाय एक है कार्य पद्धति पूजा पद्धति लगभग समान है ऐसे में इस प्रकार के उल्लेख करने से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि अनुसूचित जाति की आबादी में सफाई कर्मचारी वर्ग की भी महत्वपूर्ण और बड़ी आबादी देश में निवासरत है जिनको अनुसूचित जाति आरक्षण से अभी तक वंचित होना पड़ा है सुप्रीम कोर्ट भी 1 अगस्त 2024 के अपने निर्णय में यह स्वीकार कर चुका है कि तथा सरकारों को निर्देश दे चुका है कि राज्य सरकार यदि चाहे तो अनुसूचित जाति के आरक्षण में वाल्मीकि और वंचित समुदाय को अलग आरक्षण प्रदान कर सकती हैं ताकि उनका भी विकास संभव हो सके। ऐसा विवरण उल्लेख करने से हम सफाई कर्मचारी वर्ग का बहुत बड़ा फायदा कर सकते हैं।

 

 

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