August 19, 2026

जिनेवा में वैश्विक एआई सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे डॉ. चिन्मय पण्ड्या

भगवती प्रसाद गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

हरिद्वार 4 जुलाई। देव संस्कृति विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित होने वाले एक प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हो गए। 6 से 8 जुलाई को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र भारतीय हैं। यह सम्मेलन जिनेवा सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी (जीसीएसपी) के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें विश्वभर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, कूटनीतिज्ञ, संसदीय प्रतिनिधि, सुरक्षा विशेषज्ञ तथा मानवीय संगठनों के प्रमुख सहभागी होंगे। सम्मेलन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता से उत्पन्न हो रहे संभावित वैश्विक खतरों के समाधान के लिए साझा सुरक्षा मानकों तथा प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में ठोस विमर्श को आगे बढ़ाना है। प्रस्थान से पूर्व डॉ. पण्ड्या ने कहा कि सम्मेलन में अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ, भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया तथा संयुक्त अरब अमीरात सहित विभिन्न देशों द्वारा एआई सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों एवं साझा मानकों पर विचार किया जाएगा। रिपोर्ट में फ्रंटियर एआई मॉडलों के पूर्व मूल्यांकन, सुरक्षा परीक्षण, घटना रिपोर्टिंग, मॉडल सुरक्षा तथा जिम्मेदार एआई विकास के लिए न्यूनतम वैश्विक सुरक्षा मानकों का प्रस्ताव रखा गया है। सम्मेलन के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े गंभीर वैश्विक जोखिमों पर केंद्रित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट द एसेंशियल कन्वर्जेंस : ग्लोबल कॉम्पैक्ट ऑन एक्सट्रीम एआई रिस्क्स का विमोचन किया जाएगा। शांतिकुंज के अनुसार सम्मेलन में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता जोडी विलियम्स, जीसीएसपी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थॉमस ग्रेमिंगर, स्ट्रैटेजिक फोरसाइट ग्रुप के अध्यक्ष संदीप वासलेकर सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी संबोधित करेंगे। सम्मेलन में वैश्विक एआई गवर्नेंस, मानव सुरक्षा तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के उत्तरदायी उपयोग पर व्यापक विचार-विमर्श होगा। प्रतिकुलपति डॉ. पण्ड्या शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना देव संस्कृति विश्वविद्यालय, उत्तराखंड और देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

 

Don't Miss

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *