July 5, 2026

भारत में एथेनॉल सम्मिश्रण : नीति का विकास, प्रमुख उपलब्धियाँ तथा अक्सर जताई जाने वाली चिंताएँ

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

नई दिल्ली। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम भारत के ऊर्जा परिवर्तन तथा जैव ईंधन रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभरा है। इसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना, किसानों को समर्थन प्रदान करना तथा पर्यावरणीय प्रभावों को कम करना है। यह कार्यक्रम देश में उत्पादित नवीकरणीय ईंधन के अधिकाधिक उपयोग को भी प्रोत्साहित करता है। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम के अंतर्गत एथेनॉल सम्मिश्रण वर्ष 2013-14  के 1.5 प्रतिशत से भी कम से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गया है। भारत ने 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया। एथेनॉल की खरीद एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2013-14  में लगभग 38 करोड़ लीटर थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,200 करोड़ लीटर (अनुमानित) से अधिक हो गई। उत्पादन क्षमता वर्ष 2014 में रही 421 करोड़ लीटर से लगभग पांच गुना बढ़कर वर्ष 2026 में लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। इस विस्तार से कच्चे तेल के आयात में कमी आई है तथा बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। साथ ही, इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आई है तथा नए बाजार अवसरों के माध्यम से किसानों की आय को भी सुदृढ़ किया गया है।

एथेनॉल सम्मिश्रण के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाना :- भारत अपनी आवश्यकता के लगभग 88.5 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है। यही एक तथ्य स्पष्ट कर देता है कि क्‍यों एथेनॉल सम्मिश्रण को नीति निर्धारण में इतना अधिक महत्व दिया गया है। विदेशों से खरीदा जाने वाला कच्चे तेल का प्रत्येक बैरल देश को कीमतों में उतार-चढ़ाव तथा आपूर्ति संबंधी उन जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाता है, जिन पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। भारत में उत्पादित गन्ने, मक्का तथा चावल से निर्मित एथेनॉल देश में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए इस निर्भरता को कम करने का एक प्रभावी माध्यम प्रदान करता है। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष (ईएसवाई) 2014-15 से (मई 2026 तक) इस कार्यक्रम ने ऐसे परिणाम दिए हैं, जो कागज़ों पर दर्ज नीति लक्ष्यों से कहीं अधिक व्यापक हैं।

ई20 के प्रति विश्वास को प्रमुख वाहन निर्माताओं तथा ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों द्वारा व्यापक परीक्षणों और वास्तविक परिचालन अनुभव से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त कुछ प्रमुख टिप्पणियाँ इस प्रकार हैं:

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के देश प्रमुख तथा कार्यकारी उपाध्‍यक्ष श्री विक्रम गुलाटी : विश्वभर में वाहनों का कठोर एवं स्वतंत्र प्रमाणीकरण किया जाता है। एथेनॉल एक सिद्ध एवं उच्च प्रदर्शन वाला ईंधन है, जिसका उपयोग 1900 के दशक के प्रारंभ से किया जा रहा है। पुराने वाहनों पर व्यापक एवं कठोर परीक्षणों के बाद ही ई20 को अपनाने का निर्णय लिया गया।

मारुति सुज़ुकी के वरिष्‍ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉर्पोरेट मामले) श्री राहुल भारती : ई10 के अनुरूप निर्मित वाहनों का ई20 ईंधन के साथ व्यापक परीक्षण किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मारुति सुज़ुकी द्वारा सर्विस किए गए 2.84 करोड़ वाहनों में से 1.5 करोड़ से अधिक वाहन तीन वर्ष से अधिक पुराने थे और इसलिए ई20-प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद ई20 से संबंधित किसी प्रकार की क्षति का कोई मामला सामने नहीं आया। माइलेज के संबंध में वास्तविक प्रभाव बहुत सीमित है। यदि कोई वाहन प्रति लीटर 20 किलोमीटर का माइलेज देता है, तो इसमें लगभग 0.6 किलोमीटर प्रति लीटर की ही कमी आती है। वाहन चलाने की शैली तथा उसका रखरखाव, ईंधन के प्रकार की तुलना में माइलेज को कहीं अधिक प्रभावित करते हैं। बेहतर त्वरण (एक्‍सेलेरेशन) तथा कम प्रदूषण जैसे लाभ इस मामूली अंतर की भरपाई कर देते हैं।

हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर श्री आशुतोष वर्मा : व्यापक सर्विस आँकड़ों के विश्लेषण में यह पाया गया कि ई20 पर चलने वाले वाहनों में पहले उपयोग किए जाने वाले ईंधनों की तुलना में अधिक क्षति का कोई मामला सामने नहीं आया।

इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुश्री वर्तिका शुक्ला : एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद विकसित किया गया है। यह वैज्ञानिक साक्ष्यों, कठोर ऑटोमोटिव परीक्षणों तथा वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित है। ई20 ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानकों तथा भारत स्टेज-VI (बीएस-VI) उत्सर्जन मानकों के अनुरूप है। यह देशभर के खुदरा ईंधन विक्रय केंद्रों पर समान रूप से उपलब्ध है।

विनिर्माण तथा ऊर्जा क्षेत्रों में उद्योग जगत के अग्रणी प्रतिनिधियों का संदेश एक समान है। ई20 सुरक्षित है, व्यापक रूप से परीक्षण किया जा चुका है तथा इसके समर्थन में वास्तविक परिचालन अनुभव से प्राप्त आँकड़े उपलब्ध हैं।

एथेनॉल सम्मिश्रण वैश्विक स्तर पर सिद्ध ईंधन रणनीति है

एथेनॉल सम्मिश्रण को अपनाने वाला भारत अकेला देश नहीं है। यह आज वैश्विक स्तर पर व्यापक रूप से स्वीकृत ईंधन रणनीति बन चुका है। अनेक प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने एथेनॉल को अपनी ईंधन नीति का अभिन्न अंग बना लिया है।

संयुक्त राज्य अमेरिका : पूरे देश में ई10 मानक एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है। अमेरिकी सरकार के समर्थन से ई15 का उपयोग भी तेज़ी से बढ़ रहा है। लाखों वाहन पहले से ही फ्लेक्स-फ्यूल (बहु-ईंधन) सक्षम हैं, जो ई85 तक के एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी संचालित हो सकते हैं।

ब्राज़ील : एथेनॉल के उपयोग में ब्राज़ील आज भी विश्व का अग्रणी देश है। वर्तमान में वहाँ मानक पेट्रोल मिश्रण के रूप में ई27 अनिवार्य है, जिसे बढ़ाकर लगभग 35 प्रतिशत किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। वहाँ बिकने वाले 80 प्रतिशत से अधिक नए वाहन फ्लेक्स-फ्यूल (बहु-ईंधन) वाहन हैं, जो ई27, ई30 अथवा शुद्ध जलयुक्त (हाइड्रस) एथेनॉल पर संचालित हो सकते हैं।

जापान : जापान ने भी अपने ईंधन मिश्रण में एथेनॉल को शामिल किया है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से ई10 के उपयोग को लागू किया गया।

कनाडा, थाईलैंड तथा अनेक यूरोपीय देशों ने भी अपनी स्वच्छ ईंधन रणनीतियों के अंतर्गत एथेनॉल सम्मिश्रण को अपनाया है।

भारत में ऊर्जा के भविष्य को गति प्रदान करता ईबीपी कार्यक्रम

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम भारत की ऊर्जा रणनीति के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में विकसित हुआ है। इसकी प्रगति वैज्ञानिक मूल्यांकन, चरणबद्ध कार्यान्वयन तथा सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को प्रतिबिम्बित करती है। इस कार्यक्रम ने ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया है, उत्सर्जन में कमी लाई है तथा किसानों के लिए आय के नए अवसर सृजित किए हैं। इसके साथ ही, इसने कच्चे तेल के आयात में कमी लाने और देश में उत्पादित नवीकरणीय ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ईबीपी कार्यक्रम स्वच्छ, अधिक सुदृढ़ तथा आत्मनिर्भर परिवहन ईंधन पारितंत्र के निर्माण में आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

 

 

 

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