अल्पसंख्यक समुदाय के व्यापारी निडर होकर खोलें अपनी दुकानें

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज सर्विस

देहरादून 8 जुलाई। बीते 18 जून झंडा मौहल्ला कोतवाली क्षेत्र में हाल ही में हुई सांप्रदायिक आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला तथा दुकानों में तोडफोड व लूटपाट के बाद आज तक भी पिछले 18 जून से 7 दुकानें बन्द पडी हुई हैं, दुकान खोलने पर देख लेनी की धमकी मिल रही है। पुलिस अधीक्षक (नगर) प्रमोद कुमार सिंह ने संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि पीड़ित दुकानदार बिना किसी भय के अपनी दुकानें खोल सकते हैं और पुलिस हर संभव सहायता प्रदान करेगी।

यह घटना तब सामने आई जब कुछ पूर्व-चिन्हित तत्वों ने अल्पसंख्यक समुदाय के दुकानदारों की दुकानों पर बीते 18 जून को हमला कर तोड़फोड़ की और एक दुकानदार अदनान पर जानलेवा हमला किया। साथ ही दुकानदारों को दुकानें खाली करने की धमकियाँ दी गईं, जिससे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया।

इससे पू्र्व संयुक्त प्रतिनिधिमण्डल के ज्ञापन पर जिलाधिकारी देहरादून ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके बाद आज एसपी नगर ने संयुक्त प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत कर पीड़ितों को न्याय का आश्वासन दिया और क्षेत्राधिकारी नगर को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। ज्ञातब्य है कि बढ़ती घटनाओं का सिलसिला यह घटना उत्तराखंड में पहचान के आधार पर होने वाली हिंसा की एक कड़ी है। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि जनवरी में देहरादून के विकासनगर में दो कश्मीरी भाईयों, दानिश (20) और तबीज़ (17) पर एक दुकानदार ने हमला किया, जिसमें तबीज़ का हाथ फ्रैक्चर हो गया। आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार किया गया। कुछ माह पहले कोटद्वार में मुस्लिम व्यापारी वकील अहमद को उनकी दुकान का नाम बदलने के लिए मजबूर किया गया। बजरंग दल के 40 कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर दावा किया कि ‘बाबा’ शब्द का प्रयोग केवल हिंदुओं के लिए है। स्थानीय जिम मालिक दीपक कुमार ने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताकर दुकानदार का बचाव किया, जिसके बाद उन पर भी हमला हुआ। फरवरी 2025 में देहरादून के नाथूवाला इलाके में काली सेना के सदस्यों ने मुस्लिम किरायेदारों और दुकानदारों को निशाना बनाते हुए भड़काऊ भाषण दिए और साप्ताहिक बाजार को ‘सनातनी’ घोषित कर मुस्लिम विक्रेताओं को जबरन बाहर निकाला। इस वर्ष देहरादून में दर्जनों छूटपुट घटनाये हो चुकी हैं जिसमें चिन्हित तत्व संलिप्त हैं।

संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि एफआईआर का प्रभावी पंजीकरण और आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई। पीड़ितों और उनके परिवारों को पुलिस सुरक्षा प्रदान करना। कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराया जाय तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक निर्देश जारी करना ताकि अन्य व्यापारी भी सुरक्षित महसूस करें। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह घटना सिर्फ व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा, “भारत किसी के पिता की संपत्ति नहीं है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक, हमें कहीं भी जाने का अधिकार है। हमारा संविधान किसी पर हाथ उठाने, किसी को ‘जय श्री राम’ कहने के लिए मजबूर करने या पहचान के आधार पर हमला करने की अनुमति नहीं देता”। प्रशासन पर अब यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि पीड़ितों को न्याय मिले और कानून का शासन कायम रहे, ताकि उत्तराखंड में आने वाले बाहरी राज्यों, विशेषकर कश्मीर के व्यापारी सुरक्षित महसूस कर सकें। प्रतिनिप्रतिनिधिमंडल में सीपीएम सचिव अनन्त आकाश, उत्तराखंड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद संरक्षक नवनीत गुंसाई, यूकेडी केन्द्रीय महामंत्री लताफत हुसैन, सीआईटीयू महामंत्री लेखराज, आरयूपी अमित परमार, कांग्रेस पार्टी के मण्डल अध्यक्ष मौहम्मद अल्ताफ, नेताजी संघर्ष समिति केन्द्रीय अध्यक्ष प्रभात डण्डरियाल, एआईएलयू की अनुराधा, हिमांशु चौहान, कटारसिंह, अभिषेक भण्डारी (एडवोकेट) भगवन्त पयाल उपाध्यक्ष सीटू, रेखा शर्मा, सुरेश कुमार हसीन, अदनान, चिन्तन, नफीस, निजामुद्दीन, शम्मी, इमरान, युसुफ खान शम्मी, रविन्द्र नौडियाल,, अम्बुज शर्मा आदि बडी संख्या में लोग शामिल थे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *