सेना का आधुनिकीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : रक्षा मंत्री

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

नई दिल्ली, 14 अगस्त। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आकाशवाणी के माध्यम से सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र के ज़रिए रक्षा बलों के आधुनिकीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।” ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक-इन-इंडिया’ जैसी पहलों के कारण पिछले 12 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में आए बड़े बदलावों पर प्रकाश डालते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसा देश बन गया है जो अपनी सुरक्षा ज़रूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा कर रहा है और साथ ही एक वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र और रक्षा निर्यात करने वाले प्रमुख देश के रूप में उभर रहा है। राजनाथ सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि घरेलू रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो पिछले दशक की तुलना में लगभग चार गुना वृद्धि है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि रक्षा क्षेत्र में हुए संरचनात्मक बदलावों का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि कुल रक्षा उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों  और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं की हिस्सेदारी लगभग 76% थी, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 24प्रतिशत रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 22प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की यह बढ़ती भागीदारी रक्षा क्षेत्र में लगातार बेहतर होते कारोबारी माहौल का संकेत है। रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि रक्षा निर्यात, जो वित्त वर्ष 2013-14 में केवल 686 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो 5,500प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। उन्होंने इस उपलब्धि को रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ का सबसे मज़बूत सबूत बताया। उन्होंने कहा, “आज भारत में 145 रक्षा निर्यातक हैं और हमारे उत्पाद 80 से ज़्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं। मुझे भरोसा है कि हम 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य हासिल कर लेंगे।” श्री राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि रक्षा बजट वित्त वर्ष 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो भविष्य की रक्षा तकनीकों के प्रति भारत की बढ़ती प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “पूंजीगत व्यय 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भी हमारा ध्यान बढ़ा है। R&D बजट, जो वित्त वर्ष 2014-15 में 15,283 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2026-27 में 90% बढ़कर 29,100 करोड़ रुपये हो गया है।” रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले एक साल में, डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 8.75 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा के प्रोजेक्ट्स के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ़ नेसेसिटी’ (ज़रूरत की मंज़ूरी) दी है, जो रक्षा आधुनिकीकरण पर सरकार के ज़ोर को दिखाता है। उन्होंने इस आधुनिकीकरण प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए रक्षा खरीद में किए गए बुनियादी सुधारों को गिनाया, जिसमें ऑपरेशनल क्षमता को मज़बूत करने के लिए फील्ड कमांडरों की वित्तीय सीमा को दोगुना करना और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए रेवेन्यू रूट के ज़रिए 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की खरीद को आसान बनाना शामिल है। श्री राजनाथ सिंह ने आत्मनिर्भरता की दिशा में रक्षा बलों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की। उन्होंने ज़ोर दिया कि भारत का रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान तेज़ी पकड़ रहा है क्योंकि स्वदेशी युद्धपोत, विमान और एडवांस्ड मिलिट्री सिस्टम रक्षा बलों की क्षमताओं को मज़बूत कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि DRDO और रक्षा बल बदलते रक्षा परिदृश्य के बीच भारत को भविष्य की लड़ाई की तकनीकों में सबसे आगे ला रहे हैं। उन्होंने पहले ‘टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑग्मेंटेशन सिस्टम’ के सफल परीक्षण का विशेष रूप से ज़िक्र किया, जिसमें पारंपरिक हथियारों को ‘प्रिसिजन-गाइडेड म्यूनिशन’ (सटीक निशाना लगाने वाले हथियार) में बदलने की क्षमता है। उन्होंने कहा, “MIRV टेक्नोलॉजी से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल के परीक्षण ने रणनीतिक प्रतिरोध क्षमताओं में एक नया आयाम जोड़ा है। लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल, रुद्रम-II एयर-टू-सरफेस मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-SR और पिनाका लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट के सफल परीक्षणों ने देश की स्ट्राइक क्षमताओं को अभूतपूर्व मजबूती दी है।” 1,200 सेकंड से ज़्यादा समय तक एक्टिव कूल्ड फुल-स्केल स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर के सफल परीक्षण पर श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस उपलब्धि ने भारत को हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी विकसित करने में सक्षम चुनिंदा देशों के समूह में शामिल कर दिया है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी ‘कुशा’ लॉन्ग-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल के पहले सफल परीक्षण से देश की वायु रक्षा क्षमताएं और मजबूत हुई हैं। रक्षा मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीमावर्ती इलाकों का विकास सरकार का एक मुख्य फोकस है, क्योंकि इसका मकसद रक्षा तैयारियों और सीमावर्ती इलाकों के साथ कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। उन्होंने देश या विदेश में किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण प्राकृतिक आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ (सबसे पहले मदद के लिए पहुंचने वाले) के तौर पर रक्षा बलों की सराहना की।

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *