August 15, 2026

सरकार ने एक बार फिर स्वतंत्रता दिवस पर स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को निराश किया : अवधेश पन्त

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज सर्विस
देहरादून, 15 अगस्त। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महा परिषद ( रजि.) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने कहा कि आज जब हम देश की आजादी के 80 वें वर्ष में प्रवेश करने जा रहे हैं और स्वतंत्रता सेनानी परिवार आज भी सरकारों की उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। 1972 के बाद से चाहे देश में हो या प्रदेश में सभी सरकारों ने सेनानी परिवारों की उपेक्षा का कार्य किया है। गत वर्ष भी उत्तराखंड सरकार को महा परिषद द्वारा तीन सूत्रीय मांग पत्र सोपा गया था, जिसमें मुख्य रूप से स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को दिए जा रहे २प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर पूर्व की भांति 5 प्रतिशत पांचवीं पीढ़ी तक लागू करने हेतु मांग की गई थी, क्योंकि वर्तमान में लागू आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत द्वितीय पीढ़ी तक ही पात्रता है और स्वतंत्रता सेनानीयों की दूसरी पीढ़ी लगभग 50 की उम्र के पार हो चुकी है। ऐसे में इस आरक्षण व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। स्वतंत्रता सेनानी परिवारों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस विषय पर गंभीरता पूर्वक विचार कर अन्य देशों की तरह स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को पांचवीं पीढ़ी तक सम्मान एवं सुविधाएं देने का आग्रह किया था। इसी के साथ स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को दी जा रही सम्मान निधि को रुपए 4800 सामूहिक ना देकर कम से कम 5000 रुपए पृथक- पृथक देने की भी मांग थी। स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री के उद्बोधन में उत्तराखंड के 22000 स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का सम्मान करते हुए देहरादून में निर्मित स्वतंत्रता सेनानी सदन का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर करने की घोषणा का भी आग्रह किया गया था, किंतु आज जिस तरह मुख्यमंत्री ने मंच से घोषणा में स्वतंत्रता सेनानी शब्द तक ना बोलना, और पूर्व से चली आ रही परंपराओं के विपरीत आचरण सेनानी परिवारों के हृदय को पीड़ा दे गया। देश के महान स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का सम्मान मात्र सरकार का ही नहीं अपितु प्रत्येक नागरिक का धर्म है। आहत होकर सेनानी परिवार के कई सदस्य कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चले गए।
अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं शहीद परिवार कल्याण महा परिषद( रजि.) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अवधेश पन्त ने कहा कि अभी भी वक्त है देश के सेनानी परिवारों को एकत्रित होकर अपनी आवाज को बुलंद करना होगा और अपने जायज मांगो के लिए हुंकार भरनी होगी।

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