August 18, 2026

आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी का भव्य दीक्षा दिवस समारोह हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न

संदीप गोयल/एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के लक्ष्मण चौक स्थित हिंदू नेशनल स्कूल में त्रिदिवसीय दीक्षा दिवस महोत्सव के अंतर्गत रत्नत्रयी आराधना का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक श्रमणी आर्यिकारत्न पूर्णमति माताजी का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः माताजी के पंडाल की ओर मंगल प्रस्थान के साथ हुआ। इसके पश्चात अभिषेक, शांतिधारा, जिनेंद्र महाअर्चना, नेमिनाथ प्रभु एवं गुरु पूजन विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, कैंट विधायक श्रीमती सविता कपूर तथा विशिष्ट अतिथि श्री विशाल गुप्ता , मगन लाल पुंडीर उपस्थित रहे।
‘नेमिकुमार : राग से वैराग्य की ओर’ ने मोहा मन
समारोह का विशेष आकर्षण ‘नेमिकुमार—राग से वैराग्य की ओर’ नाटिका रही। नेमिकुमार की भूमिका निभाने वाले बालक के माता-पिता एवं अन्य कलाकारों ने इस प्रस्तुति का अत्यंत भावपूर्ण और भव्य मंचन किया। नाटिका के माध्यम से भगवान नेमिनाथ के जीवन में राग से वैराग्य की ओर हुए परिवर्तन को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इसके उपरांत भव्य दीक्षा दिवस समारोह का आयोजन हुआ। ‘गुरु समर्पण गौरव गाथा’ नामक विशेष प्रस्तुति दृष्टि पब्लिक स्कूल, सनावद (मध्य प्रदेश) के बच्चों द्वारा प्रस्तुत की गई। यह प्रस्तुति माता पूर्णमति माताजी के जीवन एवं उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व पर आधारित रही, जिसे श्रद्धालुओं ने खूब सराहा। कार्यक्रम के आयोजक श्री विद्या समय पूर्ण वर्षायोग समिति द्वारा बाहर से पधारे गणमान्य अतिथियों का माताजी के आशीर्वाद स्वरूप स्मृति-चिह्न, शास्त्र एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन ऋतु दीदी ने किया। दीक्षा दिवस समारोह में विकासनगर, ऋषिकेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, झारखंड, सहारनपुर, रुड़की, हरिद्वार, मेरठ, मुजफ्फरनगर सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह एवं भक्तिभाव के साथ दीक्षा दिवस महोत्सव में सहभागिता की।
गुरु का जीवन में विशेष महत्व : पूर्णमति माताजी
अपने मंगल आशीर्वचन में पूर्णमति माताजी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना आवश्यक है और गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में गुरु को माता-पिता से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। माता-पिता जीवन देते हैं, जबकि गुरु उस जीवन को सार्थक एवं सुंदर ढंग से जीने की कला सिखाते हैं तथा जीवन को आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाने का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु हमें सत्य, अहिंसा और आंतरिक शांति का मार्ग दिखाते हैं। जैन धर्म के प्रवचनों का मुख्य सार आत्मा को जानना, कर्मों का क्षय करना और जीवन में संयम अपनाना है। सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि शांत मन और पवित्र आत्मा में निहित है। उन्होंने श्रद्धालुओं से ‘अहिंसा परमो धर्मः’ के मार्ग पर चलने तथा मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाने का आह्वान किया।
श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में निर्वाण कल्याणक महोत्सव
इसी क्रम में जैन मिलन पारस द्वारा झंडा बाजार स्थित 167 वर्ष प्राचीन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में दो दिवसीय निर्वाण कल्याणक महोत्सव का शुभारंभ 18 अगस्त 2026 को हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन सायं 7 बजे 501 दीपों से संगीतमय एवं मनमोहक श्रीजी भगवान की महाआरती की गई। इसके पश्चात भक्तिमय भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मीडिया समन्वयक मधु जैन ने बताया कि बुधवार, 19 अगस्त 2026 को महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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