एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून। रिश्तों में मिठास और भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार रक्षाबंधन आज देशभर में मनाया गया। भाइयों ने बहनों से राखी बंधवाई और इस पर्व के जरिए भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते को याद किया। ‘रक्षा बंधन का पवित्र त्योहार भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और अटूट बंधन का उत्सव है। यह त्योहार हमें एक-दूसरे के प्रति आपसी सम्मान, समानता और जिम्मेदारी की भावना से भी जोड़ता है।’ ‘यह पवित्र बंधन और मजबूत हो, जिससे हमेशा खुशी मिले और देखभाल व सम्मान के वे मूल्य मजबूत हों जो हमारे समाज को समृद्ध बनाते हैं।’ भाई-बहन के बीच प्यार, भरोसा और स्नेह का अटूट बंधन एक साधारण धागे से बंधा रहे। भाई बहन का रिश्ता और भी प्यारा और हमेशा बना रहे, जिससे सभी का जीवन खुशियों और आशीर्वाद से भर जाए। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का प्रतीक है। साथ ही यह गुरु-शिष्य परंपरा से भी जुड़ा हुआ पर्व है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि गुरु अपने शिष्यों और पुरोहित अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद देते हैं।

प्राचीन काल से ही अपने देश के उत्सव एवं पर्व, सामाजिक, समरसता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ाने वाले रहे हैं, रक्षाबंधन इसी परम्परा की एक सशक्त कड़ी है। रक्षाबंधन को श्रावणी-पर्व भी कहा जाता है, प्राचीन काल में श्रावणी-पर्व शिक्षा से सम्बन्धित पर्व माना जाता था। उस समय अपने देश में वर्षा-काल में यातायात के सुलभ साधन उपलब्ध न होने के कारण विद्या अध्ययन केंद्र (गुरुकुल) जो नगरों से दूर बाहर जंगलों में होते थे, एकान्तवास रहता था। शिक्षा संस्थान इन दिनों बन्द कर दिये जाते थे, ऐसे समय में आचार्यवृन्द श्रावणी-पूर्णिमा से स्वाध्याय-रत होकर अधिक ज्ञानोपर्जन हेतु एक वृहद यज्ञ के रूप में उपाकर्म करते जो श्रावणी से आरम्भ होकर मार्गशीर्ष-मास तक निरन्तर चलता था। समय के साथ-साथ इस पर्व का रूप भी परिवर्तित होता गया। इस पर्व का आरंभ और विसर्जन एक ही दिन किया जाने लगा। स्कन्द पुराण के अनुसार श्रावणी-पूर्णिमा को प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में विद्वान लोग ब्राह्मणादि (श्रृति-स्मृतिज्ञान में निपुण विद्वान) सरोवर में स्नान कर नवीन यज्ञोपवीत धारण करते थे, तथा पितृ, ऋषि एवं देवताओं का तर्पण करने के पश्चात् राजाओं एवं अन्य बन्धु-बान्धवों तथा यजमानों के हाथ में शुद्ध स्वर्णिम सूत्र बांधते हुए शुभ कामनाएं करते थे। वर्तमान में रक्षाबंधन के त्योहार को आमतौर पर भाई-बहनों का पर्व मानते हैं लेकिन अलग-अलग स्थानों एवं लोक परम्परा के अनुसार अलग-अलग रूप में रक्षाबंधन का पर्व मानते हैं। वैसे इस पर्व का संबंध रक्षा से है, जो भी आपकी रक्षा करने वाला है, उसके प्रति आभार दर्शाने के लिए आप उसे रक्षासूत्र बांध सकते हैं। राखी या रक्षाबंधन भाई और बहन के रिश्ते की पहचान माना जाता है। राखी का धागा बांध बहन अपने भाई से अपनी रक्षा का प्रण लेती है।

 

 

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