September 1, 2026

निर्माण साइट पर पहुंची मेडिकल टीम, 52 की टीबी एचआईवी जांच

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

रुद्रप्रयाग। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देशन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, रुद्रप्रयाग द्वारा तत्वावधान में सुमेरपुर रेलवे निर्माण साइट में क्षय रोग तथा एवं एचआईवी/एड्स विषय पर सघन आईईसी अभियान व स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर निर्माण साइट में मौजूद 52 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. पारूल गोयल के निर्देशन में आयोजित शिविर में मेडिकल टीम द्वारा निर्माण साइट में कार्यरत 52 श्रमिक, कर्मचारी व अधिकारियों की एचआईवी स्क्रीनिंग के अलावा काउंसलिंग व एचआईवी रैपिड टेस्टिंग की गई। राहत की बात रही कि जांच में सभी लोग पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। इसके साथ ही फेफड़ों की स्थिति जानने और टीबी की स्क्रीनिंग के लिए सभी 52 लोगों के छाती के एक्स-रे भी किए गए। इस अवसर पर  जिला क्षय अधिकारी डा0 कुणाल चौधरी द्वारा एचआईवी/एड्स तथा टीबी रोग से बचाव व रोकथाम के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर जिला क्षय अधिकारी डाॅ. कुणाल चौधरी ने उपस्थित श्रमिकों एवं अन्य लोगों को क्षय रोग और एचआईवी/एड्स के प्रति विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि समय पर जांच एवं पूरा उपचार लेने से क्षय रोग ठीक हो जाता है। बताया कि लगातार खांसी, बुखार, कमजोरी, वजन कम होना, भूख में कमी अथवा अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए। उन्होंने टीबी रोगी को चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित रूप से पूरा उपचार लेने व बीच में दवा बंद न करने की सलाह दी। टीबी की रोकथाम के लिए खांसते अथवा छींकते समय मुंह और नाक को ढंकने, स्वच्छता बनाए रखने तथा संदिग्ध लक्षण होने पर समय पर जांच कराने की अपील की। एचआईवी/एड्स के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि इसके प्रति जागरूकता, सही जानकारी और समय पर जांच अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एचआईवी संक्रमण की जानकारी केवल जांच के माध्यम से ही हो सकती है, इसलिए जोखिम की स्थिति में बिना किसी झिझक के निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों में गोपनीय काउंसलिंग एवं जांच की सुविधा का लाभ लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि एचआईवी से बचाव के लिए सुरक्षित व्यवहार अपनाना, संक्रमित रक्त के उपयोग से बचना, केवल जांचे गए रक्त का ही उपयोग करना तथा सुई एवं अन्य नुकीले उपकरणों के सुरक्षित और एकल उपयोग जैसी सावधानियां महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि एचआईवी के प्रति भेदभाव और सामाजिक कलंक से बचते हुए सही जानकारी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। समय पर जांच, परामर्श और उपचार से एचआईवी के साथ भी स्वस्थ एवं बेहतर जीवन जिया जा सकता है। शिविर में प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि टीबी और एचआईवी दोनों ही विषयों में समय पर जांच, सही परामर्श और उपचार सेवाओं तक पहुंच अत्यंत महत्वपूर्ण है। जागरूकता के माध्यम से संक्रमण की रोकथाम तथा समय पर रोग की पहचान कर बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इस मौके पर आईसीटीसी लैब टेक्नीशियन अरूण चमोला, डीपीएस सुनील राणा, आईसीटीसी काउंसलर प्रियंका चौधरी, नर्सिंग अधिकारी आरती जोशी, एक्स-रे टेक्नीशियन रजत थपलियाल सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।

 

 

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