शिक्षक दिवस पर गुरु महिमा एवं स्मृति-प्रेरणा समारोह आयोजित

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून। परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं वर्तमान आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से तथा परम पूज्य आर्यिका रत्न गुरुमाँ 105 श्री पूर्णमति माताजी के पावन सान्निध्य में श्री दिगंबर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन, गांधी रोड, देहरादून में नित्य नियम पूजन के पश्चात शिक्षक दिवस के अवसर पर वीर विद्या युवा मंडल एवं विद्या सिंधु बालिका मंडल, देहरादून द्वारा विशेष स्मृति एवं प्रेरणा समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर गुरुमाँ की दीक्षा से लेकर वर्तमान समय तक की उनकी प्रेरणादायी जीवन-यात्रा एवं महत्वपूर्ण स्मृतियों को सुंदर मंच-सज्जा और चित्रों के माध्यम से पुनः जीवंत किया गया। कार्यक्रम में देहरादून सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन होता रहा। शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रातःकाल आर्यिका रत्न 105 श्री पूर्णमति माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरु की महत्ता तथा समाज और व्यक्ति के जीवन पर गुरु के प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “गुरु की नकल मत करो, बल्कि गुरु द्वारा बताए गए ज्ञान और सद्मार्ग पर आगे बढ़ो।” गुरु हमारे जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना सकता है।

सायंकाल प्रतिदिन की भाँति पाठशाला, शंका समाधान एवं महाआरती सहित विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर देहरादून जैन समाज की विद्या-समय-पूर्ण वर्षायोग समिति के विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, सदस्य, श्रद्धालु एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस अवसर पर शिक्षक के सम्मान में भावपूर्ण पंक्तियाँ प्रस्तुत की गईं—

“विपरीत परिस्थितियों में भी विश्वास लिए चलता है,

धार के विरुद्ध नदी में नाव लिए चलता है।

मृत्यु के सम्मुख भी जीवन की आस जगाता है,

शिक्षक भूख में भी भोजन मंत्र लिए चलता है।

कभी किसी हाल में किसी से नहीं हारा है,

हर निराश और टूटे मन का वह बना सहारा है।

दानव को भी मानव बनना शिक्षक सिखलाता है,

मझधार में भटकी नैया का वह बन जाता किनारा है।”

 

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