March 17, 2026

बड़े श्रद्धा के साथ निरंतर चलायमान श्री जिन सहस्रनाम महामंडल

एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस

देहरादून, 29 सितम्बर। उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून स्थित धर्मनगरी माजरा में सकल दिगम्बर जैन समाज, देहरादून, 31वां श्री पुष्प वर्षा योग समिति 2025 एवं श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर माजरा के संयुक्त तत्वावधान में नवदिवसीय जिनेन्द्र महाअर्चना आचार्य श्री 108 सौरभसागर महामुनिराज (संस्कार प्रणेता, ज्ञानयोगी एवं जीवन आशा हॉस्पिटल प्रेरणास्रोत) के पावन सान्निध्य मे चल रहा है। आज गुरु जी का मंगल प्रवास चमन विहार में सचिन जैन अमित जैन के यहां हुआ। श्री जी की शांति धारा करने का सौभाग्य सारांश जैन, मुकेश जैन महावीर एनक्लेव,सुरेश जैन मुरादाबाद वाले को प्राप्त हुआ। श्री जिन सहस्रनाम महामंडल विधान बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ निरंतर चलायमान है। अभिषेक, शांति धारा एवं नित्य नियम पूजा हो रही है। इस अवसर पर आचार्य श्री सौरभ सागर जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जिन लोगों के अंदर संस्कार नहीं होते अपने कार्यों में लगे रहते हैं कभी सत्संग में आ जाएं तो उस समय क्या चीज उनके अंदर समाहित हो जाए, क्या उनके दिमाग में बैठ जाए, कब वह धर्म से जुड़ जाए, कौन सी चीज उनके अंतरंग को छू जाए और धार्मिक भावना उनके अंदर पैदा कर दे यह पता ही नहीं चलता। पहले भी मैं देहरादून 2019 में आया था, तब में और अब में नए चेहरे ज्यादा जुड़े हैं। जिनको सम्मान की आकांक्षा नहीं, सेवा की भावना देखने को मिल रही है। जैसे निज भक्त और जिन भक्त होते हैं, भगवान की पूजा आराधना करते हैं, जो सभी करते हैं चाहे वह मिथ्या दृष्टि हो चाहे सम्यक दृष्टि हो पूजा आराधना सबके अपने देवता होते हैं ईस्ट होते हैं आदर्श होते हैं निज भक्त मतलब जिनेंद्र भगवान का भक्त कल्याण की ही सोचता है सदयुक्त होता है इच्छुक होता है सेवा भाव का समर्पण युक्त होता है उसकी क्रियाएं इतनी बढ़ जाती है वह अंतरंग से पूरा इसमें समाहित हो जाता है। साधना में इतना लीन हो जाता है और वह कब अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है पता ही नहीं चलता है। जैसे नदी बहती रहती है, चलती रहती है, समुद्र में पहुंच जाती है, किसी से रास्ता नहीं पूछती है, पता ही नहीं चलता, वह कब नदी से समुद्र बन जाती है, नदी को जल से कोई आशा नहीं होती, जल को तट की दिलासा नहीं होती। गुरु की गोद में चुपके से आकर समा जाना, समर्पण की कोई परिभाषा नहीं होती। जब अंतरंग में कोई लगन लग जाती है तो वह अपनी चरम सीमा तक पहुंच जाती है ऐसी ही लगन हम सबको लगनी चाहिए जिनेंद्र भगवान के प्रति अपने गुरु के प्रति।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि ऑर्थोपेडिक सर्जन एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष एवं पदम डॉक्टर बीकेएस संजय ने आचार्य सौरभ सागर के दर्शन माजरा मंदिर में किए तथा स्वरचित एक कविताओं का संस्करण भी उनको भेंट किया। इसी क्रम में सार्थक जैन के यहां आहार हुआ और अमित सचिन के गुरु भक्ति हुई आचार्य श्री सौरभ सागर जी महामुनिराज  के सानिध्य में श्रद्धालु जन निरंतर धर्म लाभ उठा रहे हैं और बड़ी संख्या में उनके पास पहुंच रहे हैं। संध्याकालीन बेला में माजरा मन्दिर में संगीतमय गुरुभक्ति ओर महाआरती की गई । जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति कर आनंद उठाया। इस अवसर पर समाज के गणमान्य उपस्थित रहे।

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *