संविधान दिवस: राष्ट्रीय चेतना, कर्तव्य और एकता का महापर्व
एस.के.एम. न्यूज़ सर्विस
ऋषिकेश। आज परमार्थ निकेतन में हरियाणा से आए 200 से अधिक बच्चों ने अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। स्वामी जी ने बच्चों को प्रेरक संदेश दिया— “राष्ट्र प्रथम – हम तभी हैं, जब हमारा देश है।” पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत का संविधान हमारे राष्ट्र की धड़कन, हमारी आत्मा और हमारी संस्कृति का जीवन मंत्र है।
यह केवल कानूनों का दस्तावेज नहीं, बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे उच्च आदर्शों का दिव्य संहिता है। अधिकारों के साथ—कर्तव्य निभाना ही राष्ट्र को मज़बूत बनाता है। आज हम विशेष रूप से भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. आम्बेडकर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं, जिनकी दृष्टि ने सामाजिक न्याय और मानव गरिमा पर आधारित नए भारत का मार्ग प्रशस्त किया। पूज्य स्वामी जी ने कहा—“संविधान तभी सफल होगा, जब जनता उसे आत्मसात करेगी।” उन्होंने 26/11 की दर्दनाक घटना को स्मरण करते हुए कहा कि यदि कानून का पालन सर्वोपरि हो, तो ऐसी त्रासदियाँ कभी पुनः न हों। आज हम उन वीर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा हेतु अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनका साहस और समर्पण सदैव अमर रहेगा।
आज का यह पावन दिवस हमें आत्मचिंतन का आमंत्रण देता है— क्या हम स्वच्छता, अनुशासन, सत्यनिष्ठा, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे रहे हैं? यदि हर नागरिक संविधान की मर्यादा का पालन करे, तो विकसित, सुरक्षित और समृद्ध भारत का सपना अवश्य साकार होगा।
